तो क्या टूट जाएगी हैदराबाद की मशहूर चारमीनार?
तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री मोहम्मद महमूद अली के एक बयान ने उस वक्त विवाद का रूप ले लिया जब उन्होंने ऐतिहासिक चारमीनार को गिराने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर चारमीनार का ढांचा कमजोर हो जाता है तो उसे गिरा दिया जाएगा।
एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा, '200 या 400 साल बाद जब चारमीनार जीर्ण हो जाएगी तो उसे गिरा दिया जाएगा। अगर इसे ऐसे ही जीर्ण-शीर्ण हालत में छोड़ दिया जाएगा तो यह लोगों के जीवन के लिए खतरा बन सकती है।' अली का यह बयान ओस्मानिया जनरल अस्पताल (ओजीएच) को तोड़े जाने के लेकर पूछे गए एक सवाल के बाद आया। ओजीएच को तोड़े जाने के फैसले का स्थानीय लोग, संरक्षण विशेषज्ञ और पूर्व छात्र विरोध कर रहे हैं।
यह अस्पताल अपने बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के लिए जाना जाता है। इसके टूट जाने से स्थानीय लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। वहीं अली के शहर की खास पहचान और करीब 400 साल पुराने इस कुतुब शाही ऐतिहासिक इमारत को गिराए जाने के बयान पर लोगों की कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
शहर की पहचान है इमारत
कांग्रेस से राज्य सभा सांसद वी हनुमंथ राव ने अली के इस बयान की आलोचना करते हुए कहा कि एक ऐतिहासिक इमारत को गिराने से बुरा कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो फिर ताजमहल को भी गिरा दिया जाना चाहिए क्योंकि वह भी बहुत पुराना हो चुका है।
इसके अलावा पूर्व विरासत संरक्षण समिति के सदस्य सज्जाद शाहीद ने भी अली के इस बयान को गैरजिम्मेदाराना करार देते हुए कहा, 'किसी को भी चारमीनार गिराने की बात करने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए।' उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री का यह बयान उनकी इन इमारतों के बारे में कम जानकारी को दर्शाता है इसलिए वे इन इमारतों को संरक्षित कराने के बजाय इनको गिराने की बात कह रहे हैं। अगर ऐसा ही था तो फिर सरकार ने इस ऐतिहासिक इमारत को अपना मोनोग्राम क्यों बनाया?
जब उप मुख्यमंत्री से इस बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उनके बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है। उनके बयान पर विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, 'न तो सरकार का और ना ही मैं इस इमारत को तोड़ना चाहता हूं। हम प्यार करते हैं और इसे बचा कर रखेंगे। मैंने केवल उदाहरण के लिए इस इमारत की तुलना की थी। चारमीनार अगले 500 साल तक खड़ी रहेगी।'