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बदलते मौसम से उत्तरी ग्रिड पर बढ़ा संकट

Sun, 16 Jun 2013 10:44 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sun, 16 Jun 2013 10:44 PM IST
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changing weather increased on northern grid crisis

दिल्ली समेत उत्तरी राज्यों में समय से पहल दस्तक देने जा रहे मानसून पूर्व बारिश से किसानों के चेहरे तो खिल गये हैं, लेकिन बिजली क्षेत्र की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

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बारिश ने उत्तरी ग्रिड के लिए खतरा पैदा कर दिया है क्योंकि मौसम में आ रहे बदलाव के चलते कई बार बिजली की मांग अचानक इतनी घट जा रही है कि सरप्लस बिजली से ग्रिड को बचाए रख पाना मुश्किल हो रहा है। पूरा मानसून आने तक यह संकट बना रह सकता है।
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अमूमन जून में बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है, लेकिन बारिश के चलते तापमान में गिरावट के चलते घर व दफ्तरों के ज्यादातर एसी बंद हो रहे हैं।

बुधवार को आई बारिश के चलते उत्तरी ग्रिड में अचानक 2500 मेगावाट की कमी आ गई। इस पर आनन-फानन में बिजली घरों को बंद करना पड़ा।

मुश्किल यह है कि थर्मल प्लांट को बंद करने के लिए ज्यादा समय चाहिए। जबकि जल विद्युत प्लांट को बंद करने में ज्यादा समय नहीं लगता है, लेकिन मई से जून के दौरान ज्यादातर जल विद्युत प्लांट मरम्मत के लिए बंद रहते हैं। इससे ग्रिड को ज्यादातर बिजली थर्मल प्लांटों से मिल रही है।
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बुधवार को अचानक मांग घट जाने से थर्मल प्लांटों को बंद नहीं किया जा सका और नतीजतन उत्तरी ग्रिड कुछ देर के लिए ट्रिप भी कर गया। अब भी संकट नही टला है।

विद्युत मंत्रालय का मानना है कि मानसून के आने पर नदियों में भी जल स्तर बढ़ने लगेगा व सभी जल विद्युत प्लांट चलने लगेंगे तो संकट भी घट जाएगा।

मानसून आने पर मांग पहले से ही कम हो जाएगी व यदि अचानक कमी भी होती है तो जल विद्युत प्लांटों को बंद किया जा सकेगा।

उत्तरी राज्यों में फिलहाल बिजली की मांग 36,850 मेगावाट है, जिसमें लगभग 1150 मेगावाट की कमी है। मगर बारिश होने पर मांग में भी तेजी से कमी आ जा रही है। ऐसे में सरप्लस बिजली को ठिकाने लगाने का रास्ता नहीं मिल पा रहा है।

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