फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   changes after delhi gangrape

...जब दिल्ली गैंगरेप ने देश को झकझोर दिया

Fri, 08 Mar 2013 10:29 AM IST
अवनीश पाठक/इंटरनेट डेस्क
अवनीश पाठक/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 08 Mar 2013 10:29 AM IST
विज्ञापन
changes after delhi gangrape

चंद दिनों पहले तक रेप अपराध नहीं बल्कि अभिशाप था। समाज में औरत का सम्मान शरीर की पवित्रता से तय होता था उसकी आजादी का सवाल ना सरकार के एजेंडे पर था, ना ही समाज के।

विज्ञापन


बातचीत के दायरे में भी वह ‘दिखावटी माल’ से अधिक नहीं थी। दिल्ली गैंगरेप ने हालात में बहुत बदलाव नहीं किए, फिर भी इसने कुछ ऐसी चीजें बदलीं, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
विज्ञापन


टीवी पर पहली बार दुष्कर्म पीड़ित की एक ऐसी छवि दिखी, जो घुटनों की बीच सर छिपाकर या दोनों हाथों से चेहरा ढंककर सामने नहीं आई, बल्कि उसकी आंसू भरी आंखें एकटक हमारी ओर देखती रहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


रेप पीड़ित के ये नए विजुअल समाचार चैनलों की संवेदना से नहीं उभरे, बल्कि सड़क पर उतर आए हजारों युवाओं की न्याय की लड़ाई और समाज की दकियानूसी सोच पर पड़ी चोट से उभरे।

पहली बार रेप पीड़ित के लिए न्याय की गुहार की गई। स्टूडेंट्स, मीडिया, कोर्ट, पार्लियामेंट सभी इसका हिस्सा बने। पहली बार दुष्कर्मियों के लिए कड़ी सजा और पीड़ित के लिए सम्मान की मांग की गई।

दिल्ली गैंगरेप ने हमारी चेतना को झकझोर दिया। मामूली सा दिखने वाला ये बदलाव दरअसल एक बहुत बड़े बदलाव की ओर पहला कदम था, दिल्ली गैंगरेप ने लोगों को इस कदम के लिए मजबूर कर दिया।

16 दिसंबर की रात चलती बस में 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा से गैंगरेप और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अंतराल में देश में कई बदलाव हुए। एक नजर उन बदलावों पर-

देश भर में प्रदर्शन

16 दिसंबर की रात चलती बस में गैंगरेप की भयावह घटना ने सभी को झकझोर दिया। हजारों की संख्या में छात्र और छात्राएं सुरक्षा और न्याय की मांग करते हुए सड़कों पर उतर आए। राजधानी का राजपथ 'वी वॉन्ट जस्टिस' के नारों से गूंज उठा।

आजादी के बाद ये पहला मौका था, जब इंडिया गेट, विजय चौक और राजपथ पर हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हुए। सरकार ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए पानी की बौछारें की, आंसू गैंस के गोले छोड़े और बर्बर ढंग से लाठी चार्ज किया, फिर भी वे अड़े रहे।

रायसीना हिल्स, राजपथ, इंडियागेट, विजय चौक, 10 जनपथ समेत देश के कोने-कोने में प्रदर्शन हुए। गैंगरेप के खिलाफ हुए प्रदर्शनों ने दुनिया भर की मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा।

भारत की खराब कानून व्यवस्था और लचर आपराधिक न्याय प्रक्रिया की सभी ने आलोचना की।

महिला हेल्पलाइन

महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर दिल्ली सरकार ने विशेष महिला हेल्पलाइन शुरू की। हेल्पलाइन का नंबर 181 है। इस नंबर पर डायल कर मुसीबत में फंसी महिलाएं सीधे मुख्यमंत्री दफ्तर से मदद मांग सकती हैं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यालय से राज्य के सभी थानों को जोड़ा गया। दिल्ली सरकार की ही तर्ज पर अन्य राज्यों ने भी महिला हेल्पलाइन की शुरूआत की।

राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस और ट्रैफिक पुलिस ने भी विशेष लाइन शुरू की।

जस्टिस वर्मा कमेटी

केंद्र सरकार ने स्त्रियों की सुरक्षा और उससे जुड़े नए कानून बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस जेएस वर्मा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया। कमेटी के अन्य सदस्य जस्टिस लीला सेठ और पूर्व सॉलीसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम थे।

देश भर से मिले 80 हजार सुझावों, कानूनविदों, सामाजिक संगठनों से बातचीत के बाद मात्र 29 दिनों में कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी। कमेटी ने महिला सुरक्षा के लिए कड़े कानून की सिफारिश की।

कमेटी की सिफारिशों में पहली बार इंटरनेट स्टॉकिंग, आफ्स्पा, मेडिकल जांच से जुड़े नियमों की समीक्षा की बात कही गई। कमेटी की सिफारिशों को आधार बनाकर केंद्र ने महिला सुरक्षा अध्यादेश लागू किया।

महिला सुरक्षा अध्यादेश

जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी की सिफारिशें लागू करने के दबाव को देखते हुए केंद्र ने बजट सत्र के पहले महिला सुरक्षा अध्यादेश लागू कर दिया।

केंद्र ने रेप से जुड़े कानून को वुमेन फ्रेंडली बनाने का प्रयास किया। अध्यादेश में रेप के कारण पीड़ित की मौत या उसके मरणासन्न हालत में पहुंचने के मामलों में मृत्युदंड का प्रावधान किया गया।

अध्यादेश में दुष्कर्म की परिभाषा में भी बदलाव किए गए। ‘दुष्कर्म’ शब्द की जगह ‘यौन अत्याचार’ शब्द का इस्तेमाल किया गया।

हालांकि जेएस वर्मा कमेटी की कई सिफारिशों को हूबहू न लागू करके इसमें कई बदलाव किए गए। सामजिक संगठनों ने सरकार के इस कदम का विरोध भी किया।

बदल गईं बसें

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा ने दिल्ली गैंगरेप के बाद महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर विशेष बसें चलाने की घोषणा की।

बसों में महिलाओं की सीटों के आरक्षित करने के साथ ही उन्हें गुलाबी रंग रंगने का प्रस्ताव भी दिया गया। ट्रैफिक पुलिस ने भी महिलाओं की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन जारी की।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बसों समेत सभी वाहनों पर लगे काले पर्दे हटाने की कवायद शुरू हुई।

नाबालिग की उम्र

दिल्ली गैंगरेप ने नाबालिग की उम्र पर भी बहस छेड़ दी। दिल्ली गैंगरेप के एक आरोपी की उम्र वारदात के दिन 18 वर्ष से कम थी, जबकि पीड़िता के परिजनों के बयान से समाने आया की 16 दिसंबर की रात दरिंदगी करने में वो सबसे आगे था।

इसके बाद कानूनविदों और मीडिया ने नाबालिग की उम्र सीमा पर विचार करने की अपील की। सरकार ने नाबालिग अपराधों से जुड़ें किसी भी कानून में बदलाव से इनकार कर दिया।

हालांकि जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग आरोपी पर हत्या और बलात्कार की धाराओं में आरोप तय करने की इजाजत दी।

निर्भया फंड, महिला बैंक

दिल्ली गैंगरेप के बाद वित्त मंत्रालय ने भी जेंडर बजटिंग की ओर कदम बढ़ाया। वित्त मंत्रालय ने महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए बजट में 100 करोड़ के 'निर्भया फंड' की घोषणा की।

वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर महिला बैंक बनाने का प्रस्ताव भी दिया।

अमेरिकी सम्मान

अमेरिकी सरकार ने दिल्ली गैंगरेप की शिकार लड़की को महिला साहस की मिसाल मानते हुए मरणोपरांत सम्मानित करने का फैसला किया।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने लड़की के अदम्य साहस के लिए उसे मरणोपरांत सम्मान दिया। अमेरिकी विदेश मंत्री की ओर से दिया जाने वाला ये सम्मान 'इंटरनेशनल वीमेन ऑफ़ करेज अवार्ड' कहलाता है।


सुर्खियां बनी खबरें

दिल्ली गैंग रेप से आए बदलावों पर टिप्प्णी करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार अशोक कुमार पांडेय ने कहा, 'दिल्ली गैंगरेप ने और कुछ भले न बदला हो लेकिन पहली बार ऐसा हुआ की रेप की खबरें चौथे-पांचवे पेज से उठकर पहले पेज पर आ गईं।'

दिल्ली गैंगरेप के बाद पुलिस और मीडिया ने ऐसे मामलों को दर्ज करना शुरू किया। ये हमारी पुलिस और मीडिया में आया सकारात्मक बदलाव है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed