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यौन अपराध: मानसिकता को बदलने की जरूरत

Sun, 10 Mar 2013 12:50 AM IST
मुंबई/एजेंसी
मुंबई/एजेंसी Updated Sun, 10 Mar 2013 12:50 AM IST
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change in mindset key to curbing sexual crimes says justice verma

पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस वर्मा ने कहा कि यौन अपराधों के मामले में कानूनों से ज्यादा महत्वपूर्ण समाज की मानसिकता को बदलना है।

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महिलाओं के अधिकारों व न्याय के लिए अभियान निरंतर चलना रहना चाहिए।

वे दिल्ली में चलती बस में हुए चर्चित गैंगरेप के बाद महिलाओं के खिलाफ अपराधों के कानूनों की समीक्षा के लिए बनाई गई कमेटी के अध्यक्ष थे।

इंडियन मर्चेंट्स चैंबर द्वारा महिलाओं के अधिकारों पर आयोजित कांक्लेव में जस्टिस वर्मा ने कहा कि इस मामले में सरकार से ज्यादा नागरिक समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि 1875 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया था।
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लेकिन भारत में एक सदी बाद महिला अधिकारों से संबंधित अभियान ने जोर पकड़ा। बीते साल दिसंबर में दिल्ली गैंगरेप का बाद आंदोलन शुरू हुआ। ऐसा क्यों है कि ऐसे भयानक गैंगरेप के बाद लोग सोचने को मजबूर होते हैं।
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यौन अपराधों के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा देश के युवाओं को पुलिस के उकसावे के बावजूद अपना शांतिपूर्ण विरोध जारी रखना चाहिए।

मैंने पुलिस द्वारा युवा लड़के-लड़कियों की निर्दयतापूर्वक पिटाई के दृश्य देखे हैं पर वे बिना किसी प्रतिक्रिया के शांतिपूर्वक अपना प्रदर्शन करते रहे। इससे महात्मा गांधी जरूर खुश हुए होंगे।


युवाओं का अभियान स्वत: जीवित रहेगा क्योंकि इसका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है। उन्होंने हैरत जताई कि गैंगरेप के तुरंत बाद बाद सरकार ने दिल्ली पुलिस प्रमुख की क्यों तारीफ की।

उन्होंने महिलाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि पुलिस एफआईआर नहीं दर्ज करती। यौन हमलों की शिकार महिला पहले से ही अपमानित होती है और उसे थाने में भी अपमान सहना पड़ता है। उसे भद्दे तरीके से होने वाले मेडिकल परीक्षण व बाद में मुकदमे से गुजरना होता है।

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