चुनावों से पहले सोनिया को लगा बड़ा झटका
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अलग तेलंगाना राज्य बनने पर कांग्रेस के रंग में रंगने का वादा करने वाले तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने कांग्रेस को जबरदस्त झटका दिया है।
पहले कांग्रेस में विलय से इंकार कर चुके राव ने शनिवार को कांग्रेस से चुनावी गठबंधन से भी इंकार कर दिया। साथ ही राव ने कांग्रेस में तोड़फोड़ के अपने इरादे भी जाहिर कर दिए हैं।
चौंकाने वाला फैसला
माना जा रहा है कि राव ने केंद्र में सत्ता बदलने की संभावनाओं के मद्देनजर अपना विकल्प खुला रखा है। राव के इस फैसले से कांग्रेस हाईकमान हक्का-बक्का है।
राव ने कांग्रेस से गठबंधन न करने के लिए अपनी पार्टी के 90 फीसदी नेताओं की राय न होने का बहाना किया है, लेकिन राजनीतिक सच्चाई यही है कि केंद्र में सरकार बनने के संभावित नए समीकरणों और तेलंगाना के सबसे दबंग क्षत्रप बनने की रणनीति के तहत राव ने यह फैसला किया है।
हाशिए पर कांग्रेस
कांग्रेस के साथ गठबंधन से इंकार कर राव ने सोनिया गांधी से किए गए वादे को तोड़ दिया है। तेलंगाना राज्य बनने से पहले उन्होंने सोनिया से वादा किया था कि राज्य बनने के बाद वह अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर देंगे।
सीमांध्र में वाईआरएस कांग्रेस के जगन मोहन रेड्डी के उदय के बाद खुद को हाशिए पर पा रही कांग्रेस ने तेलंगाना के 17 लोकसभा सीटों पर अपनी पताका फहराने की रणनीति के तहत आंध्र प्रदेश के बंटवारे को तमाम विरोधों के बावजूद संसद के आखिरी सत्र में अंजाम दिया था।
यूपीए को चुनौती
मगर राव ने पहले विलय और अब गठबंधन से इंकार कर कांग्रेस को नाजुक मोड़ पर छोड़ दिया है। तेलंगाना में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए राव ने कांग्रेस के सांसदों व विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल करने की कसरत भी तेज कर दी है।
साथ ही उन्होंने यूपीए गठबंधन का हिस्सा रहे एमआईएम नेता असादुद्दीन ओवैसी से गठबंधन कर हैदराबाद में कांग्रेस के खाते में जाने वाले मुस्लिम वोटों को भी अपने पाले में लाने की मोर्चाबंदी कर ली है।