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कर्ज नहीं चुका पाया, 14 साल से कार में रह रहा है ये कर्जदार

Mon, 01 Feb 2016 12:57 PM IST
Updated Mon, 01 Feb 2016 12:57 PM IST
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chandrasekhar gauda story

चंद्रशेखर गौड़ा जंगल में 14 वर्षों से अपनी कार में सिर्फ इसलिए रह रहा है क्योंकि वह अपनी जमीन गंवाने के बाद एक कोऑपरेटिव सोसायटी को 50,400 रुपये का कर्ज नहीं चुका सका। उसकी दुर्दशा को देखते हुए जिला के अधिकारी उस व्यक्ति के पुनर्वास का प्रयास कर रहे हैं। 43 वर्षीय गौड़ा अभी सुलिया के निकट एक जंगल में एकाकी जीवन गुजार रहा है। टोकरी बुनकर वह अपना भरण-पोषण करता है।

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नेल्लुरू केमराजे कोऑपरेटिव सोसायटी का 50,400 रुपये का कर्ज न चुका पाने के कारण उसकी 2.29 एकड़ जमीन 2002 में नीलाम कर दी गई और उसे मजबूरन निर्वासित होना पड़ा।
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उसने एक सेकंड हैंड कार खरीदी और उसे सुलिया से सटे एक जंगल में पार्क कर उसे ही अपना घर बना लिया। वह लगभग 14 साल से सप्ताह में एक बार 21 किमी पैदल चलकर सुलिया आता है और अपनी बुनी टोकरी 40-40 रुपये के हिसाब से बेच कर लौट जाता है।
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14 साल से कार को बना रखा घर

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हाल में उसकी यह कहानी एक कन्नड़ चैनल पर आई थी जिससे दक्षिण कन्नड़ के डिप्टी कमिश्नर एबी इब्राहिम का ध्यान इस मामले की ओर गया। जिलाधिकारी कार्यालय के अनुसार, इब्राहिम उसके पुनर्वास की व्यवस्था करने में जुटे हैं।

28 जनवरी को इब्राहिम ने इस मसले पर चर्चा के लिए विशेष बैठक बुलाई थी और गौड़ा की जबानी उसकी कहानी सुनने के लिए उसे मंगलूरू बुलाया था।

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