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शिक्षा संबंधी लंबित बिलों को पास करना चुनौती
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Fri, 16 Nov 2012 10:39 PM IST
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शीतकालीन सत्र 22 नवंबर से शुरू हो रहा है। इस सत्र में मानव संसाधन विकास मंत्रालय में पहली बार कैबिनेट मंत्री बने पल्लम राजू के लिए मंत्रालय के लंबित बिलों को पास कराना बड़ी चुनौती होगी।
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संसद में लंबित मंत्रालय के 11 विधेयकों में से तीन बिलों को पास कराने पर नये मंत्री का जोर रहेगा। इनमें अनफेयर प्रैक्टिसेज इन हायर एजुकेशन सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अलावा वे एजुकेशनल ट्रिब्यूनल बिल तथा नेशनल एक्रीडिएशन रेग्युलेटरी अथॉरिटी बिल को भी इसी सत्र में पास कराना चाहेंगे।
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उच्च शिक्षण संस्थानों में खासकर मेडिकल एवं तकनीकी शिक्षा संस्थानों में अनियमितताओं को रोकने के लिए यह बिल वर्ष 2010 में संसद में पेश किया गया था। स्थायी समिति तथा एससी, एसटी सांसदों के फोरम के सुझावों के आधार पर संशोधन के बाद कैबिनेट ने इस बिल को स्वीकृति प्रदान कर दी है। अब यह बिल को सदन में पेश किया जाएगा।
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नेशनल ट्रिब्यूनल बिल वर्ष 2010 में इस आशय से लाया गया था कि देश के सभी शैक्षणिक संस्थानों के विवादों को निस्तारण के लिए केंद्र तथा राज्य स्तर पर ट्रिब्यूनल के माध्यम से निपटाया जा सके। अभी इस तरह के मामले विभिन्न स्तर पर न्यायालयों में जाते हैं। इससे न केवल न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ पड़ रहा है, बल्कि मामले को निपटाने में काफी समय भी बर्बाद होता है। संशोधन के बाद इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा।
नेशनल एकेडमिक डिपाजिटरी बिल 2011 में संसद में पेश किया गया था। इसके तहत राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे ऑनलाइन डाटाबेस तैयार किए जाने का प्रस्ताव है, जिसमें देश में किसी भी स्तर पर होने वाले शैक्षणिक परीक्षा व पाठ्यक्रमों को पास करने वाले छात्रों के रिजल्ट तथा मार्कशीट तथा सर्टिफिकेट उपलब्ध होंगे।
इस डाटाबेस को भुगतान के आधार पर विभिन्न शिक्षा संस्थाओं तथा कंपनियों को उपयोग की सुविधा दी जाएगी। इसके माध्यम से किसी संस्थान में प्रवेश लेने अथवा नौकरी पाने वाले युवाओं के शैक्षणिक रिकार्ड को आनलाइन जांचने की सुविधा होगी। इसके अलावा संसद में पेश आर्किटेक्ट संशोधन विधेयक, बिहार में दूसरे विवि के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक को भी इसी सत्र में पास कराने की कोशिश होगी।