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'नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती'

Thu, 05 Dec 2013 09:57 PM IST
Updated Thu, 05 Dec 2013 09:57 PM IST
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challenge to narendra modi for opem debate on article 370

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने गुजरात के मुख्यमंत्री और अगले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को अनुच्छेद 370 पर खुली बहस की चुनौती दी है।

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जम्मू में एक रैली के दौरान नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 का मुद्दा उठाया था और राज्य सरकार की आलोचना भी की थी।

इस पर जवाब देते हुए जम्मू में एक जनसभा के दौरान उमर अब्दुल्लाह ने कहा, "अगर वे मेरे साथ अनुच्छेद 370 पर बहस करना चाहते हैं, तो उन्हें ये तय करने दीजिए वे कब और कहाँ इस पर बात करना चाहते हैं। अगर वे अहमदाबाद में भी इस पर बहस करना चाहते हैं, तो हम कभी भी इसके लिए तैयार हैं।"
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नरेंद्र मोदी ने एक दिसंबर को जम्मू में अपनी रैली के दौरान इस पर सवाल उठाया था कि क्या इस अनुच्छेद से राज्य के लोगों का भला हुआ है?

उमर अब्दुल्लाह ने कहा, "मैं चकित हूँ कि वे लोग जो जम्मू-कश्मीर के बारे में कुछ भी नहीं जानते, वे इस पर टिप्पणी कर रहे हैं। जिन लोगों ने अनुच्छेद 370 के बारे में नहीं पढ़ा है, वे इसके बारे में बातें कर रहे हैं। अनुच्छेद 370 न तो संपत्ति के अधिकार की बात करता है और न ही यहाँ रहने के क़ानून के बारे में। अनुच्छेद 370 एक प्रावधान है, जो इस राज्य को बाक़ी देश से जोड़ता है।"
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आलोचना
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा कि वे जानते हैं कि किसने अनुच्छेद 370 को नुक़सान पहुँचाया है और इससे जम्मू-कश्मीर कितना प्रभावित हुआ है।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों के बारे में नरेंद्र मोदी की 'कम जानकारी' की भी आलोचना की।

उमर अब्दुल्लाह ने कहा, "मैं इस पर ज़्यादा आश्चर्यचकित हूँ कि जो लोग उच्च पदों पर हैं और इससे भी ऊँचे पद का सपना देख रहे हैं, उन्हें जम्मू-कश्मीर के लोगों के बारे में कितनी कम जानकारी है। एक ऐसे ही नेता ने हाल ही में जम्मू में भाषण दिया और दावा किया कि राज्य में गूजरों के साथ अन्यायन हो रहा है।"

इस मामले पर अपनी राय ट्विटर पर पहले ही ज़ाहिर कर चुके मुख्यमंत्री अब्दुल्लाह ने मोदी को ख़ूब खरी-खोटी सुनाई।

उन्होंने कहा, "शायद हमारा राज्य एकमात्र राज्य है, जहाँ इस समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया है मोदी साहब। अगर आपको ये मुद्दा उठाना ही था, तो आपको इसे राजस्थान में उठाना चाहिए था, जहाँ गूजर इस दर्जा को हासिल करने के लिए बलिदान दे रहे हैं।"

मुद्दा
उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि शिया समुदाय के बारे में नरेंद्र मोदी को कम जानकारी है। उन्होंने उनकी आलोचना की कि अपने जम्मू दौरे के क्रम में उन्होंने कश्मीरी पंडितों का मुद्दा नहीं उठाया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ़्रेंस हमेशा से ये कहती रही है कि कश्मीर पंडितों के बिना अधूरा है और ये ज़रूरी है कि उन्हें घाटी में लौटना चाहिए।

उन्होंने अपने दादा शेख़ अब्दुल्लाह के उस नारे का ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था- शेर-ए-कश्मीर का क्या इरशाद, हिंदू, मुस्लिम और सिख इत्तेहाद।

उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि वे लोगों को बाँटते नहीं न ही लोगों को एक-दूसरे के ख़िलाफ़ खड़ा करते हैं।

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