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नीतीश के सामने जदयू में फूट रोकने की चुनौती
हिमांशु मिश्र/नई दिल्ली
Updated Sun, 03 Nov 2013 09:02 AM IST
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राजद को तोड़ने का मंसूबा पाले बैठे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने अब अपनी ही पार्टी को टूट से बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध के सवाल पर वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी की खुले विरोध की चिंगारी की आंच अब जदयू में धीरे-धीरे तेज होने लगी है।
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पार्टी से निलंबित सांसद और विधायकों ने नीतीश विरोधी मुहिम की शुरुआत कर दी है। हालत यह है कि जदयू को जहां राजद में टूट का इंतजार है, वहीं भाजपा मोदी के सवाल पर खुद जदयू में टूट का इंतजार कर रही है।
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निलंबित सांसदों और विधायकों में से कुछ ने राजद से नाता जोड़ने का संकेत दिया है तो कुछ भाजपा के साथ आना चाहते हैं। वरिष्ठ नेता रमई राम, विधायक नीरज बबलू और पूर्व विधायक रणबीर यादव पाला बदलने के लिए फिलहाल सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं।
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पार्टी में कांग्रेस के साथ नाता जोड़ने पर भी गहरे मतभेद हैं। धुर कांग्रेस विरोधी नेता किसी भी कीमत पर कांग्रेस के साथ जाने के पक्ष में नहीं है। इसलिए इस बारे में अंतिम निर्णय होते ही जदयू में बगावत तय मानी जा रही है।
उल्लेखनीय है कि चारा घोटाला मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक करियर सलाखों में कैद हो जाने के बाद नीतीश ने इस पार्टी के मुस्लिम नेताओं को तोड़ने की रणनीति बनाई थी।
राजद सूत्रों का दावा है कि इस क्रम में नीतीश ने राजद विधायक दल के नेता अब्दुल बारी सिद्दकी को उपमुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव गुपचुप भेजा था। मगर नीतीश की रणनीति परवान चढ़ने के बदले खुद जदयू में मोदी के सवाल पर कोहराम मचना शुरू हो गया।
जदयू सूत्रों का कहना है कि इस बहाने पार्टी में नीतीश विरोधियों को अच्छा खासा मौका मिल गया है। इनमें से एक धड़ा मोदी के पक्ष में बोल रहा है तो दूसरा धड़ा नीतीश की कांग्रेस के साथ बढ़ती नजदीकियों की तीखी मुखालफत कर रहा है।
शरद यादव और शिवानंद तिवारी जैसे नेता कांग्रेस से चुनावी गठबंधन के सख्त खिलाफ हैं। जबकि नीतीश की रणनीति कांग्रेस के साथ खड़ा होकर मुस्लिम मतदाताओं का एकमुश्त वोट हासिल करने की है।
यही कारण है कि नीतीश कांग्रेस से नजदीकी बढ़ाने के साथ-साथ राजद के मुस्लिम नेताओं को भी पार्टी से जोड़ने की मुहिम पर काम कर रहे थे।
माना जा रहा है कि पार्टी से निलंबित किए गए तीन सांसद जयनारायण निषाद, पूर्णमासी राम, मंगनीलाल मंडल, विधायक नीरज बबलू, छेदी पासवान और पूर्व विधायक रणबीर यादव भाजपा का दामन थामेंगे।
जबकि कभी लालू के करीबी रहे रमई राम एक बार फिर राजद का दामन थाम सकते हैं। अंतिम फैसला करने से पहले ये नेता जदयू के अधिक से अधिक नेताओं को अपने पाले में करने की कोशिशों में जुटे हैं।