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राहुल के लिए बड़ी चुनौती, किसे चुनें और किसे छोड़ें?

Sun, 15 Jun 2014 08:32 AM IST
Updated Sun, 15 Jun 2014 08:32 AM IST
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challange for rahul who will be next president of up congress?

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब कांग्रेस हाईकमान सबसे पहले मृत पड़ी उत्तर प्रदेश कांग्रेस को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करना चाह रही है। इसके लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने नए प्रदेश अध्यक्ष को चुनने के लिए प्रदेश ओर केंद्रीय स्तर के शीर्ष नेताओं से बातचीत का दौर खत्म कर लिया है।

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अब नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम के ऐलान का इंतजार है। मगर दिलचस्प बात यह है कि नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए राहुल गांधी ने कभी अपनी पहली पसंद रहे जीतिन प्रसाद और आरपीएन सिंह के नाम को नामंजूर कर दिया है। इन दोनों पूर्व केंद्रीय मंत्रियों से राहुल दरअसल इसलिए नाराज हैं, क्योंकि दोनों को चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी संभालने की पेशकश की गई थी।
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मगर राहुल की युवा बिग्रेड में खास जगह रखने वाले इन दोनों नेताओं ने जिम्मेदारी संभालने से इंकार कर दिया था। इसलिए अब राहुल दोनों को ये जिम्मेदारी देने के लिए तैयार नहीं है, जबकि दोनों इस कुर्सी के लिए जमकर कोशिश कर रहे हैं।
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कौन होगा कांग्रेस का उत्तर प्रदेश्‍ा अध्यक्ष?

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कांग्रेस ने जिला और ब्लॉक समेत पूरी प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भंग कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री नए अध्यक्ष चुने जाने तक पद पर बने हुए हैं।

सोनिया और राहुल दोनों नए प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी के लिए तमाम नेताओं से राय मशविरा कर चुके हैं। जीतिन और आरपीएन सिंह का नाम खारिज होने के बाद अब चार नाम प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी के लिए सबसे आगे माने जा रहे हैं।

पूर्व सांसद पीएल पुनिया, राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी, पूर्व सांसद राजेश मिश्रा और राजा राम पाल का नाम प्रदेश अध्यक्ष के लिए चर्चा में हैं। इन नेताओं के पक्ष और विपक्ष में तमाम बिंदुओं की समीक्षा करने के बाद ही हाईकमान कोई अंतिम फैसला लेना चाहता है।

कांग्रेस को कौन कर पाएगा खुश?

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पीएल पुनिया के लिए उनके विरोधी तर्क देते है कि ये कभी बसपा सुप्रीमो मायावती के बेहद करीबी सिपाहसलारों में से एक रहे हैं और मूलत: उत्तर प्रदेश से बाहर के माने जाते हैं।

वहीं प्रमोद तिवारी के लिए कहा जा रहा है कि वह सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी माने जाते हैं। सपा की बदौलत ही उनका राज्यसभा में आना संभव हुआ। उन्हें बनाने से गलत संदेश जाएगा। बनारस से लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं पाने वाले राजेश मिश्रा के लिए कांग्रेस की ब्राह्मण लॉबी पूरा जोर लगा रही हैं।

ये लॉबी हाईकमान को तर्क दे रही है कि मिश्रा को नरेंद्र मोदी के खिलाफ बनारस का टिकट नहीं मिलने से उनके साथ अन्याय हुआ। अगर उन्हें टिकट दिया जाता तो बनारस में कांग्रेस दूसरे नंबर पर रहती। वहां अजय राय आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार अरविंद केजरीवाल के बाद तीसरे नंबर पर रहे थे। वहीं अकबरपुर से पूर्व सांसद राजा राम पाल का नाम भी चर्चा में है। हालांकि उन्हें भी उनके विरोधी बाहरी उम्मीदवार बता रहे हैं।

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