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रेप मामलों को जल्द निपटाने की कवायद शुरू
पीयूष पांडेय/नई दिल्ली
Updated Wed, 26 Dec 2012 07:51 AM IST
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दिल्ली में चलती बस में एक युवती से गैंगरेप की घटना के बाद पूरे देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों को तेजी से निपटारे की मांग पर केंद्र सरकार संजीदा नजर आ रही है। केंद्र देशभर में दुष्कर्म के आरोपियों को जल्द सजा दिलाने के लिए कदम उठाने जा रही है। कानून मंत्रालय इस संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के मुकदमों की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालतों में किए जाने की सिफारिश सभी हाईकोर्ट से करेगा।
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कानून मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले सभी अपराधों के मुकदमों की सुनवाई को फास्ट ट्रैक कोर्ट में तो नहीं की जा सकती, क्योंकि इन अदालतों की संख्या सीमित है और इनका गठन जघन्य अपराधों के मामले की सुनवाई के लिए ही किया गया था।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले भी दुष्कर्म के मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित किया जाता रहा है लेकिन ऐसा हाईकोर्ट स्वत: या फिर सरकार की सिफारिश पर करता था। सरकार इस मुद्दे पर गंभीर है और यह चाहती है कि दुष्कर्म के सभी मुकदमों की सुनवाई रोजाना हो और पीड़ितों को जल्द न्याय मिले। इसलिए इन मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में डालने के लिए मंत्रालय सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को पत्र लिखकर इस संबंध में सिफारिश करेगा।
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गौरतलब है कि 11वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर फास्ट ट्रैक न्यायालयों के गठन का प्रावधान किया गया था। देश में 1734 फास्ट ट्रैक कोर्ट हैं, सन् 2005 और फिर 2010 में इन्हें जारी रखा गया था। अदालतों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर गत वर्ष केंद्र ने पांच हजार करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला लिया था।
सूत्रों के मुताबिक फास्ट ट्रैक कोर्ट बढ़ाने के मुद्दे पर भी कानून मंत्रालय की ओर से वित्त मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा, क्योंकि पिछले साल आवंटित धन से अदालतों की संख्या बढ़ाने और उनमें ढांचागत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए राज्य सरकारों को सूचित किया जा चुका है।
मुकदमों के निपटारे में देरी के मद्देनजर एनएचआरसी अध्यक्ष व पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने अदालतों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को बड़ी समस्या बताया था। उन्होंने अदालतों को संख्या बढ़ाए जाने के साथ खस्ताहाल अदालतों की स्थिति सुधारने पर जोर दिया था। गौरतलब है कि अदालतों में बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के संबंध में 13वें वित्त आयोग ने केंद्र से धन उपलब्ध कराने की सिफारिश की थी।