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छात्रों को घाटा, एजुकेशन लोन पर घट सकती है सब्सिडी

Wed, 04 Feb 2015 11:44 AM IST
Updated Wed, 04 Feb 2015 11:44 AM IST
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central government will cut interest subsidy on education loan

गरीब छात्रों को शिक्षा कर्ज पर सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी घटाने पर विचार चल रहा है। मानव संसाधन मंत्रालय के इस प्रस्ताव को लेकर विरोध शुरू हो गया है।

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मंत्रालय पर आरोप लगाया गया है कि वे गरीब छात्रों पर ब्याज देने का दबाव बना रही है। गरीब छात्रों को पेशेवर और तकनीकी शिक्षा देने के लिए ब्याज मुक्त शिक्षा कर्ज देने की योजना मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से चलाई जा रही है।
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यूपीए सरकार ने ब्याज मुक्त शिक्षा कर्ज देने की योजना की शुरुआत की थी। सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय का प्रस्ताव है कि छात्र शिक्षा कर्ज पर ब्याज का 50 फीसदी हिस्सा खुद अदा करें।
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बाकी सरकार अदा करेगी। कांग्रेस और उसकी छात्र इकाई एनएसयूआई ने इसका विरोध किया है। एनएसयूआई ने कहा है कि अगर सरकार ऐसा करती है तो वह इसके खिलाफ सड़कों पर उतरेगी।

सब्सिडी घटाने पर विचार

central government will cut interest subsidy on education loan

मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि इस स्कीम का ज्यादातर फायदा सिर्फ चार राज्य आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु तक ही सीमित रह गया है। स्कीम सभी जरूरतमंद छात्रों तक नहीं पहुंच पा रही है। इसलिए स्कीम पर दी जाने वाली सब्सिडी को घटाने पर विचार किया जा रहा है।

मंत्रालय ने योजना की समीक्षा करने के लिए समिति भी बनाई है। वहीं कई शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मंत्रालय को चाहिए कि वह इस स्कीम का प्रचार करे। अभी इस योजना के बारे में देशभर के छात्रों को पता नहीं है। दक्षिण भारत में यह योजना काफी लोकप्रिय है। विशेषज्ञों का मानना है कि योजना के प्रचार और प्रसार पर ध्यान देने की जरूरत है।

सब्सिडी को घटाने से छात्रों को नुकसान होगा। उधर, कांग्रेस प्रवक्ता अजय कुमार ने कहा है कि मोदी सरकार के राज में अच्छे दिन आ गए हैं।

सरकार गरीबों को हर तरह की आर्थिक सहायता को बंद करना चाहती है। ब्याज मुक्त शिक्षा देने के अलावा सरकार खाद्य सब्सिडी का दायरा घटाने पर विचार कर रही है। पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है।

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