फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Central government wants coal block allocation.

कोल ब्लॉकों की फिर से नीलामी चाहती है केंद्र सरकार

Tue, 02 Sep 2014 01:12 AM IST
Updated Tue, 02 Sep 2014 01:12 AM IST
विज्ञापन
Central government wants coal block allocation.

केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह 218 कोल ब्लॉकों की दोबारा नीलामी के पक्ष में है। इन कोल ब्लॉकों के आवंटन को गैरकानूनी घोषित किया जा चुका है।

विज्ञापन


हालांकि साथ ही वह इनमें से 40 ब्लॉकों के मामले में छूट चाहती है क्योंकि इनमें खनन का काम हो रहा है और वे उनके कोयले का अंतिम इस्तेमाल करने वाले बिजली संयंत्रों के लिए तैयार हैं।
विज्ञापन


साथ ही 6 ब्लॉकों में खनन काम शुरू होने वाला है। केंद्र ने कहा कि वह नए सिरे से नीलामी चाहती है जिससे विकास का पहिया तेजी से घूम सके।

मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ की पीठ के समक्ष अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि सरकार कोर्ट के 25 अगस्त के फैसले के साथ है। सरकार 218 कोयला खदानों की फिर से नीलामी करना चाहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हालांकि यदि इनमें से करीब 46 खदानों को बचाया जा सके तो खुशी होगी क्योंकि इनमें खनन का काम चल रहा है और वे उत्पाद का अंतिम इस्तेमाल करने वाले संयंत्रों को आपूर्ति करने के लिए तैयार हैं। साथ ही अन्य 6 ब्लॉकों में खनन का काम शुरू होने वाला है।

बिजली संकट पैदा हो सकता

Central government wants coal block allocation.

अगर सभी आवंटन रद्द कर दिए जाते हैं तो देश में बिजली संकट पैदा हो सकता है। देश में पहले से ही बिजली की भारी कमी है। 218 ब्लॉक में से सरकार 80 आवंटन पहले ही निरस्त कर चुकी है।

बाकी बचे 138 में से सिर्फ 46 के आवंटन निरस्त न करने का अदालत से अनुरोध किया जा रहा है।

अटार्नी जनरल ने कहा कि उन 40 खदानों को, जिनके लिए आवश्यक मंजूरी विचाराधीन है और वे काम कर रही हैं, एक जैसा नहीं मानना चाहिए और उन्हें निरस्तीकरण से छूट दी जा सकती है बशर्ते वे सरकार को 295 रुपये प्रति टन की दर से क्षतिपूर्ति के लिए राजी हों और इस घाटे को पूरा करने के लिये 95 रुपये प्रति टन की दर से बिजली खरीद का समझौता करने के लिए तैयार हों।

पीठ ने अटार्नी जनरल से जानना चाहा कि यह उनका निर्णय है या सरकार का। इस पर उन्होंने कहा कि वह केंद्र सरकार के निर्णय से अदालत को अवगत करा रहे हैं।

रिटायर्ड न्यायाधीशों की समिति बनाने के पक्ष में नहीं सरकार
अटार्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सरकार सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की कोई भी समिति बनाने के पक्ष में नहीं है। दरअसल कोर्ट ने सुझाव दिया था कि इन आवंटन को गैरकानूनी घोषित करने के फैसले के नतीजों का विश्लेषण करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति बनाई जाए।

अटार्नी जनरल ने कहा कि हम कोई समिति नहीं चाहते। यदि इन्हें जाना है तो सभी कोयला खदान आवंटन को जाना चाहिए। मेरी राय ही सरकार का विचार है।

विशेष सरकारी अभियोजक की मदद को 3 वकील नियुक्त

Central government wants coal block allocation.

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष सरकारी अभियोजक (एसएसपी) आरएस चीमा के उस अनुरोध को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने कोल ब्लॉक आवंटन मामले की ट्रायल कार्यवाही के लिए 3 सीबीआई अभियोजकों की मदद मांगी थी।

कोर्ट ने वरिष्ठ सरकारी अभियोजक वीके शर्मा, संजय कुमार और एपी सिंह को चीमा की सहायता के लिए नियुक्त किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले में उसका निर्णय सुलझा और सतर्कतापूर्ण है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मामले की सीबीआई जांच चल रही थी। ऐसे में हमारा कोई भी निष्कर्ष मामले में पूर्वाग्रह जैसा होता।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed