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तीसरी लहर की तैयारी: केंद्र ने कहा- बच्चों में कोरोना के मामूली लक्षण, पर इनसे फैल सकता है संक्रमण

Sat, 22 May 2021 06:15 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sat, 22 May 2021 06:15 PM IST
सार

कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर का सामना कर रहे देश में तीसरी लहर के बारे में जानकारियां सामने आने के बाद लोगों में भय का माहौल है। तीसरी लहर में बच्चों को अधिक खतरा बताया जा रहा है। वहीं, केंद्र सरकार ने इस बारे में शनिवार को अहम बात कही।

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Central government says children can spread covid amid preparations for third wave
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

केंद्र सरकार ने लोगों को सावधान करते हुए कहा है कि बच्चों में कोरोना वायरस के मामूली लक्षण मिल रहे हैं, मगर उनसे संक्रमण फैल सकता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि बच्चों की संक्रमण के चलते होने वाली मौतें बहुत ही कम हैं। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा, अभी तक के अध्ययनों में पता चला है कि बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने की वजह से उनमें कोरोना के लक्षण नहीं होते या फिर मामूली होते हैं।

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हालांकि, कुछ बच्चों में गंभीर परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं, इसलिए सर्तकता बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, बच्चों को बचाने के लिए भी कोई अलग नियम नहीं है। वयस्कों की तरह इन्हें भी सामाजिक दूरी, मास्क से बचाया जा सकता है। बिना घबराहट के बच्चों को बचाने पर जोर देना चाहिए। डॉक्टरों की जिम्मेदारी भी बनती है कि बच्चे और उसके परिवार को संक्रमण न हो पाए। बच्चों में कोविड सतर्कता नियमों की आदत डालना बहुत जरूरी है।
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डॉ. पॉल ने कहा, जो महिलाएं शिशुओं को स्तनपान करा रही हैं और टीका भी ले रही हैं उन्हें किसी भी तरह की अफवाह में नहीं रहना है। टीका लेने के बाद भी स्तनपान जारी रख सकती हैं। उनके शिशु के लिए यह बहुत जरूरी है। अभी तक ऐसा कोई सुबूत विज्ञान को नहीं मिला है जिसके आधार पर कहा जाए कि टीका लेने के दो से तीन दिन बाद स्तनपान कराना है। यह पूरी तरह से गलत है।
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देश के ज्यादातर हिस्सों में थम रहा संक्रमण: पॉल
देश में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को कहा, कोरोना की संक्रमण दर 12 दिन में करीब आधी रह गई। 10 मई को संक्रमण दर 24.83 फीसदी थी, जो 22 मई को घटकर 12.45 फीसदी हो गई है। पॉल ने कहा, देश के ज्यादातर हिस्सों में संक्रमण थम रहा है। हालांकि, चिंता की बात यह है कि 31 राज्यों के 382 जिलों में अभी भी यह संक्रमण काफी अधिक है। यहां हर दिन 10 फीसदी से ज्यादा सैंपल कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं। पहली बार कोरोना महामारी ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंची है। जहां बीमारी, वहां उपचार के सूत्र पर सभी को मिलकर काम करना होगा। तभी इस महामारी से बाहर आया जा सकता है।

सक्रिय मामले घटकर 11.12 फीसदी पर पहुंचे
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि 28 अप्रैल से चार मई के बीच देश के 531 जिलों में 100-100 से भी अधिक मामले दर्ज किए जा रहे थे, लेकिन अब इन जिलों की संख्या घटकर 468 हो चुकी है। ठीक इसी तरह 29 अप्रैल से पांच मई, छह से 12 मई और 13 से 19 मई के बीच उन जिलों की संख्या बढ़ी है जहां नए मामले लगातार कम हो रहे हैं। यह संख्या क्रमश: 210, 214 और अब 303 तक पहुंच गई है। उन्होंने बताया कि 20 दिनों से देश में सक्रिय मामलों में कमी देखी जा रही है। बीते तीन मई को देश में 17.13 फीसदी सक्रिय मामले थे, जो कि अब यह घटकर 11.12 फीसदी हो गए हैं। ठीक होने की दर भी 87.76 फीसदी तक पहुंच चुकी है।

ब्लैक फंगस की दवा का बढ़ाया जा रहा उत्पादन
लव अग्रवाल ने बताया कि ब्लैक फंगस के लिए एम्फोटेरीसिन-बी की देश में सीमित उपलब्धता थी, उसे बढ़ाया जा रहा है। पांच अतिरिक्त विनिर्माताओं को लाइसेंस दिलाने का कार्य किया जा रहा है। अभी जो विनिर्माता हैं, वे भी उत्पादन बढ़ा रहे हैं।

दूसरी लहर में अब तक 420 डॉक्टरों की गई जान
अब दो दिन में ही देश के 91 डॉक्टरों की कोरोना संक्रमण के चलते मौत हुई है। महामारी की दूसरी लहर में अब तक 420 डॉक्टरों की मौत हो चुकी है। इससे पहले तीन दिन में 85 डॉक्टरों ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने शनिवार को फिर से रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि बीते 20 मई तक देश में 329 डॉक्टरों की जान गई थी लेकिन 22 मई तक उनके पास यह संख्या बढ़कर 420 हो चुकी है।

देश में अगस्त से शुरू होगा स्पूतनिक-वी का उत्पादन
भारत में  मई के अंत तक स्पूतनिक की 30 लाख से अधिक की आपूर्ति की जाएगी और जून में इसके बढ़कर 50 लाख होने की उम्मीद है। रूस भारत को अब तक 2 लाख स्पूतनिक टीके की आपूर्ति कर चुका है। रूस में भारतीय राजदूत डी बाला वेंकटेश वर्मा ने यह जानकारी देते हुए कहा, रूस जल्द ही भारत को स्थानीय स्तर पर स्पूतनिक-वी वैक्सीन बनाने की तकनीक सौंपेगा। इसके बाद अगस्त से भारत में वैक्सीन का उत्पादन शुरू हो जाएगा। देश में शुरुआत में टीके की 85 करोड़ खुराक का उत्पादन करने की रणनीति बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सिंगल खुराक वाली स्पूतनिक लाइट के लिए भी रूस ने प्रस्ताव दिया है। भारत में अभी इसे मंजूरी मिलनी बाकी है।

देश: छठे दिन भी तीन लाख से कम मामले, पहली बार एक दिन में 21 लाख जांच
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि बीते छह दिन से देश में नए मामलों की संख्या तीन लाख से कम बनी हुई है। वहीं चार दिन से कोरोना वायरस की सबसे अधिक जांच भी हो रही है। जबकि स्वस्थ होने वाले रोगियों की संख्या नौ दिन से अधिक मिल रही है। मंत्रालय के अनुसार, एक दिन में 2,57,299 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 4194 लोगों की मौत हो गई। इस दौरान 3,57,630 मरीजों को स्वस्थ घोषित किया है। देश में पहली बार एक दिन में 20.66 लाख सैंपल की जांच हुई है जिनमें 12.45 फीसदी सैंपल कोरोना संक्रमित मिले हैं। 

आठ राज्यों में कोरोना के सक्रिय मामले एक लाख से ऊपर
हालांकि, मंत्रालय ने बताया कि देश में अभी भी आठ राज्य ऐसे हैं जहां कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या एक लाख से अधिक है। वहीं, 18 राज्य ऐसे हैं जहां कोविड सकारात्मकता दर 15 फीसदी से ऊपर है। मंत्रालय ने कहा कि कुल मिलाकर कोविड के मामलों में कमी आ रही है लेकिन अभी भी 382 जिलों में सकारात्मकता दर 10 फीसदी से अधिक है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि सात राज्य ऐसे हैं जहां रोजाना 10 हजार से अधिक मामले सामने आ रहे हैं और छह राज्यों में यह आंकड़ा पांच से 10 हजार के बीच है। छह राज्यों में कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा ऊंचा है। इनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पंजाब और दिल्ली हैं।

क्या एक व्यक्ति को लगाए जा सकते हैं अलग-अलग टीके?
प्रेस वार्ता में मौजूद रहे नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने कहा कि देश के बड़े हिस्से में कोरोना महामारी की स्थिति अब नियंत्रण में आ रही है। डॉ. पॉल ने कहा कि देश में कोरोना की सकारात्मकता दर घट रही है और महामारी के सक्रिय मामलों में भी कमी आ रही है, जो कि हमारे लिए एक सकारात्मक संकेत है। 


डॉ.पॉल ने कहा, एक व्यक्ति को पहली खुराक दूसरे टीके की और दूसरी खुराक किसी और टीके लगाना वैज्ञानिक और सैद्धांतिक रूप से यह संभव है। लेकिन इसकी सिफारिश करना अभी ठीक नहीं है क्योंकि यह स्थिति अभी विकसित हो रही है। अभी इसके बारे में पुख्ता प्रमाण नहीं हैं और आने वाले समय में ही यह पता चल सकेगा।

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