'राम मंदिर का निर्माण न्यायालय के निर्णय के तहत हो'
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राम मंदिर के मुद्दे पर संघ प्रमुख मोहन राव भागवत के विवादित बयान को लेकर मचे घमासान के बीच सरकार ने इस मुद्दे पर अपना रूख साफ कर दिया है। संसदीय कार्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, हम स्पष्ट करना चाहते है कि राम मदिंर के निर्माण का मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और न्यायालय के निर्णय का हम सब सम्मान करते हैं।
हम सबको इसका सम्मान करना चाहिए। नकवी ने कहा कि जहां तक राम मदिंर के निर्माण के संकल्प की बात है। उस संकल्प को दोहराने का सबको अधिकार है और उस संकल्प को दोहराने का निर्माण के संबंध में हमारा स्पष्ट मत है कि राम मदिंर का निर्माण न्यायालय के निर्णय के तहत होना चराहए और न्यायालय के निर्णय का सबको सम्मान करना चराहए।
इससे पहले राज्यसभा में सपा ने सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जोर शोर से यह मुद्दा उठाया। सपा सदस्यों के हंगामे के चलते सभापति हामिद अंसारी को सदन की कार्यवाही दोपहर तक स्थगित करनी पड़ी।
संघ और सरकार के खिलाफ नारेबाजी
नकवी के बयान से पहले सपा सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि मोहन भागवत ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर बनेगा और इसके लिए कुरबानी देने के लिए तैयार रहें।
यादव ने कहा कि इस बयान के बाद देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया है। यह देश की अखंडता और एकता के लिए खतरा है। यादव ने कहा कि राम मंदिर मुद्दा अदालत में विचाराधीन होने के बाद भी भागवत ने यह बयान दिया।
संघ को सरकार का समर्थन हासिल है। सपा ने संघ प्रमुख के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही बंद करके इस मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। सपा सांसद सभापित के आसन के सामने आ गए। उन्होंने संघ और सरकार के खिलाफ नारे लगाए।