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रिटायर्ड बाबुओं पर चुनाव आयोग का सुझाव नामंजूर

Mon, 07 Oct 2013 12:27 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 07 Oct 2013 12:27 PM IST
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central government rejected recommendation of election commission of india
नौकरशाह पहले की तरह रिटायर होते ही अपनी राजनीतिक पारी शुरू कर सकेंगे। सरकार ने चुनाव आयोग के उस सुझाव को मानने से इंकार कर दिया है, जिसमें नौकरशाहों को रिटायर होने के तत्काल बाद राजनीति में आने से रोकने के लिए एक निश्चित समय सीमा निर्धारित करने की सलाह दी थी।
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आयोग के सुझाव को ठुकराते हुए सरकार ने कहा है कि ऐसा करना संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ होगा। दरअसल रिटायर होते ही खास तौर से आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के चुनाव में उतरने पर आयोग ने चिंता जाहिर की थी।
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आयोग का मानना था कि ऐसे नौकरशाह कार्यकाल के अंतिम दिनों में किसी खास दल या नेता के हित में पक्षपात भरा निर्णय कर सकते हैं। आयोग ने बीते साल कार्मिक और विधि मंत्रालय को इस आशय का प्रोटोकोल तैयार करने का सुझाव दिया था।
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आयोग ने सरकारी कर्मचारियों के लिए नौकरी से हटने के एक साल तक वाणिज्यिक रोजगार स्वीकार करने पर रोक संबंधी नियम की भी याद दिलाई थी। सरकार ने विधि मंत्रालय और एटार्नी जनरल की राय का हवाला देते हुए आयोग से कहा कि ऐसा करना संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं होगा।


एटार्नी जनरल ने अपनी राय में अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए कहा है कि भारतीय संविधान इस तरह के रोक के खिलाफ है। वैसे भी चुनाव लड़ने का अधिकार चूंकि नागरिकता के कारण मिला है, इसलिए इस अधिकार पर बिना किसी संवैधानिक आधार पर रोक लगाना अनुचित होगा।
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