संत रामपाल मामले में केंद्र ने बचाई खट्टर सरकार की लाज
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संत रामपाल मामले में बुरी तरह घिरी हरियाणा की खट्टर सरकार की लाज केंद्र सरकार ने बचा ली। दरअसल राज्य सरकार की प्रशासनिक अनुभवहीनता के कारण पूरे मामले के राजनीतिक रंग ले लेने के बाद खुद गृह मंत्री राजनाथ सिंह को मोर्चा संभालना पड़ा।
हालांकि प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति में केंद्र सरकार की अगुवाई कर रहे गृहमंत्री मंगलवार तक इस मामले में सीधे हस्तक्षेप से बच रहे थे। बुधवार को जब हालात और बिगड़ गए तब केंद्रीय गृह मंत्रालय की सलाह पर सतलोक आश्रम में ऑपरेशन का जिम्मा सीआरपीएफ को दे दिया गया।
इस कड़ी में वहां पहले से ही भेजे जा चुके 1500 अर्द्घसैनिक बलों के जवानों के अतिरिक्त आनन फानन 500 अतिरिक्त जवान भेजे गए। इससे पहले आश्रम की ओर से हमले होने की सूचना के बावजूद सतही ढंग से चलाए गए ऑपरेशन और इस दौरान मीडियाकर्मियों की पिटाई ने गृह मंत्री को नाराज कर दिया था।
पूरे प्रकरण में राज्य सरकार के हाथ पांव फूल गए थे। राज्य सरकार की पूरे मामले में हड़बड़ाहट का अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री खट्टर केंद्रीय गृह मंत्री के प्रोग्राम की जानकारी हासिल किए बिना बुधवार दोपहर बाद दिल्ली पहुंच गए थे। इस दौरान राजनाथ जम्मू के चुनावी दौरे के क्रम में हवाई सफर में थे।
अर्द्घसैनिक बलों ने ऑपरेशन को दिया अंजाम
राजनाथ का विमान जब जम्मू हवाई अड्डे पर उतरा तभी उनकी खट्टर से बात हो पाई। बुधवार को खट्टर राज्य के प्रभारी अनिल जैन को भी लगातार फोन पर स्थिति की जानकारी देते रहे।
राजनाथ इस दौरान जम्मू में थे और हवाई जहाज से उतरने के बाद ही उनकी फोन पर खट्टर से बात हो पाई। बातचीत के बाद भी हालांकि केंद्र इस मामले को राज्य के कानून व्यवस्था का मामला बताता रहा, मगर अंदरखाने सीआरपीएफ ने पूरी तरह से ऑपरेशन की कमान संभाल ली।
भाजपा सूत्रों ने माना कि खट्टर सरकार संत रामपाल मामले के रूप में आई पहली ही अग्निपरीक्षा में पास नहीं हो सकी। इस पूरे प्रकरण में न केवल राज्य सरकार की प्रशासनिक अनुभवहीनता सामने आई, बल्कि बार बार पूरे मामले को सतही ढंग से लेने से पार्टी की भी फजीहत हुई।
दरअसल केंद्र सरकार इस मामले में सीधा हस्तक्षेप से बचना चाहती थी। मगर जब आश्रम की ओर से हमले की तैयारी की खुफिया सूचना के बावजूद ऑपरेशन को बेहद सतही अंदाज में अंजाम देने की कोशिश हुई तो केंद्र की नींद हराम हो गई।
सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को स्थिति के विस्फोटक होने और इस पूरे मामले में भाजपा, राज्य सरकार के साथ-साथ केंद्र सरकार की भी फजीहत शुरू होने के बाद बुधवार को केंद्र ने परोक्ष तौर पर इस पूरे मामले की कमान संभाल ली। ऑपरेशन के दौरान सीआरपीएफ की टीम लगातार अपने महानिदेशक के संपर्क में रही।