राहुल की इमेज चमकाने को सरकार का नया दांव
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लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के भ्रष्टाचार विरोधी चेहरे को मांज कर पेश करने की जुगत में लगी सरकार अब वर्तमान सत्र की अवधि बढ़ाने की कोशिशों में जुट गई है।
उसकी योजना मौजूदा सत्र की दो बैठकें बढ़ा कर राहुल के भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे वाले बिलों को कानूनी जामा पहनाने की है। सत्र की अवधि बढ़ाने के लिए एक ओर जहां सरकार विपक्ष को मनाने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर आगामी शुक्रवार को कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक बुलाई है।
सत्र नहीं बढ़ा तो अध्यादेश आएगा!
अगर विपक्ष सत्र का कार्यकाल बढ़ाने पर राजी नहीं हुआ तो सरकार भ्रष्टाचार विरोधी बिल पर अध्यादेश लाएगी। संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि सरकार की पहली कोशिश संसद में इन बिलों को पारित कर कानूनी जामा पहनाने का होगा।
अगर ऐसा नहीं हुआ तो इन सभी बिलों को कानूनी जामा पहनाने के लिए सरकार अध्यादेश का सहारा लेगी। कांग्रेस प्रवक्ता शशि थरूर ने भी कहा कि अगर यह छह बिल पारित नहीं हुए तो फिर अध्यादेश लाने के विकल्प पर गौर किया जाएगा।
विपक्ष कर सकती है इनकार
राहुल को आगे बढ़ाने की कवायद की सरकार की मंशा भांपते हुए विपक्ष अभी से सत्र की अवधि बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार करना शुरू कर दिया है।
विपक्षी नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा है कि बेहद महत्वपूर्ण बिल होने के कारण वह इसे किसी भी कीमत में हड़बड़ी में पारित नहीं कराने देगी।
बीते दिनों राहुल की भ्रष्टाचार विरोधी छह बिलों को पारित कराने के लिए शुरू की गई मुहिम के बाद सरकार ने शीतकालीन सत्र को दोबारा बुलाया था।
कई बिल है लंबित
राहुल ने बीते दिनों लंबित पड़े न्यायिक जवाबदेही, व्हिसल ब्लोवर प्रोटेक्शन, समय पर सेवा और सुनवाई का अधिकार, विदेशी और गैरसरकारी अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में रिश्वत निरोध, भ्रष्टाचार रोधी और सरकारी खरीद बिल को हर हाल में संसद से पारित कराने की मुहिम शुरू की थी।
मगर तेलंगाना पर मचे हंगामे के कारण इनमें से एक भी बिल को कानूनी जामा नहीं पहनाया जा सका। अब जबकि सत्र का कार्यकाल शुक्रवार को खत्म हो रहा है, तब सरकार सत्र की अवधि आगामी 25 फरवरी तक बढ़ा कर सभी बिलों को पारित कराना चाहती है।
इसके लिए शुक्रवार को कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक बुलाई गई है।