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सरकार ने दर्जनों संदिग्ध बैंक खातों को किया सीज

Fri, 20 Nov 2015 08:39 AM IST
ब्यूरो, एजेंसी/ नई दिल्ली
ब्यूरो, एजेंसी/ नई दिल्ली Updated Fri, 20 Nov 2015 08:39 AM IST
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central government closed Suspect bank accounts

आतंकवादियों को फंड मुहैया कराने और अवैध धन की मनी लॉन्ड्रिंग करने के आरोप में भारत ने 37 संदिग्ध संस्थाओं के बैंक खाते सीज किए हैं। जिसमें करीब 2.12 करोड़ रुपये जमा है। यह जानकारी मिली है फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) संस्था की हालिया रिपोर्ट से।

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वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टेरर फंडिंग पर अंकुश लगाने की सख्त जरूरत के एलान के साथ ही सुरक्षा एजेंसियों ने कमर कस ली है। सरकार की सभी खुफिया और वित्तीय संस्थान अब पाकिस्तान के दो सबसे बड़े आतंकी संगठन लश्करे-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद तक पहुंचने वाले धन का लेखा जोखा तैयार करेंगे।
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लश्कर और जैश समेत उन सभी आतंकी संगठनों के मनी ट्रेल का खाका भी तैयार किया जा रहा है , जो सीधे या परोक्ष तरीके से भारत के खिलाफ कार्रवाई में शामिल हैं। पेरिस पर हुए हमले और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों तक पहुंचने वाले फंड पर रोक लगाने की मंशा से यह रिपोर्ट जारी की गई है। इसमें बताया गया है कि 15 अगस्त तक भारत ने 3 7 संस्थाओं के संदिग्ध बैक
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खाते सीज कर दिए हैं।

सबसे ज्यादा पैसा जकात से

central government closed Suspect bank accounts

अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन के साथ भारत भी इस वैश्विक संस्था एफएटीएफ का सदस्य है। आईएस जैसे आतंकवादी संगठनों की बढ़ती ताकत पर अंकुश लगाने के लिए हाल ही में हुए जी-20 देशों के सम्मेलन में भारत समेत सभी सदस्य देशों ने मिलकर मुकाबला करने की बात कही थी।

जैश-ए-मोहम्मद और लश्करे-ए-ताइबा की फंडिंग पर भी लगाम कसने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारतीय एजेंसियों के पास सिर्फ जम्मू-कश्मीर में सक्रिय हिजबुल मुजाहिद्दीन को होने वाली फंडिंग की जानकारी है।

भारत ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संगठन फाइनेंसियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) को पिछले साल जानकारी दी थी कि हिजबुल मुजाहिद्दीन को विभिन्न चैनलों से पिछले आठ साल में आठ करोड़ रुपये मिले। इसका इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में आतंकी कार्रवाई को अंजाम देने, अशांति फैलाने और मारे गए आतंकियों के परिवार की सहायता के लिए खर्च के तौर पर किया गया।

सूत्रों ने बताया कि लश्कर और जैश को सबसे ज्यादा पैसा जकात (दान) से आता है। अमेरिका से प्रतिबंध लगने के बाद यह संगठन समाज सेवा के बहाने जमात-उद-दावा के नाम से पैसे इकट्ठा करती है।

इसके अलावा पाकिस्तानी अंडरवर्ल्ड के अपहरण की फिरौती और ड्रग्स के धंधे का बड़ा हिस्सा भी इन आतंकी संगठनों तक पहुंचता है। इसमें पाकिस्तान के सरकारी तंत्र का एक तबका भी मदद करता है।

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