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दुर्गा शक्ति के लिए मोदी सरकार ने बदले नियम

Fri, 09 Jan 2015 02:17 PM IST
Updated Fri, 09 Jan 2015 02:17 PM IST
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Modi government changed rules for IPS Durga Shakti

रेत माफिया की नाक में दम करने और अवैध निर्माण मामले में सख्ती बरतने के कारण निलंबन का शिकार होने वाली उत्तर प्रदेश कैडर की 2010 बैच की युवा आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को केंद्र सरकार का बड़ा सहारा मिला है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति संबंधी समिति ने नियमों को शिथिल करते हुए नागपाल को तीन साल के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री का ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) नियुक्त किया है।
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पांच साल से कम की सेवा में ही नागपाल को बतौर अवर सचिव (अंडर सेक्रेट्री) रैंक की नियुक्ति दी गई है। इसके साथ ही केंद्र ने उत्तर प्रदेश सरकार से नागपाल को तत्काल मुक्त करने का आग्रह भी किया है। आईएएस अधिकारी की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए संबंधित अधिकारी की कम से कम पांच साल की न्यूनतम सेवा अनिवार्य है।
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केंद्र सरकार ने नियमों में दी ढील

Modi government changed rules for IPS Durga Shakti

मगर नागपाल मामले में केंद्र सरकार ने इस नियम को शिथिल कर दिया है। इस फैसले को केंद्र सरकार की ओर से ईमानदार अधिकारियों के संरक्षण का संदेश देने के रूप में देखा जा रहा है।

केंद्र सरकार ने पीएम नरेंद्र मोदी की रुचि दिखाने के बाद बीते साल नवंबर महीने में ही नागपाल को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर लेने की तैयारी शुरू कर दी थी। इसके मद्देनजर जरूरी विजिलेंस जांच भी पहले ही पूरी की जा चुकी थी।

उल्लेखनीय है कि खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई के कारण चर्चा में आईं नागपाल के निलंबन पर बीते साल जबरदस्त सियासी बवाल हुआ था। तब न केवल तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पूरे मामले में हस्तक्षेप किया था, बल्कि आईएएस एसोसिएशन ने भी इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया था।

माफियाओं पर कार्रवाई कर सुर्खियों में आई दुर्गाशक्ति

Modi government changed rules for IPS Durga Shakti

दनकौर के कादलपुर गांव में 25 जुलाई 2013 को एक धार्मिक स्थल की दीवार गिराने के बाद सदर तहसील की एसडीएम (आईएएस) दुर्गा शक्ति नागपाल देशभर में सुखिर्यों में आ गई थी।

मामला धार्मिक स्थल से ज्यादा बालू खनन माफियों पर कार्रवाई का था। इसी मुददे को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 26 जुलाई को निलंबन का दिया था।

एसडीएम के निलंबन के ठीक 52 दिन बाद डीएम रविंकांत सिंह का भी तबादला कर दिया गया था। हालांकि इस घटना के बाद से प्रदेश सरकार की काफी किरकिरी हुई थी और उसके बाद प्रदेश सरकार ने बालू खनन पर सख्ती बरतनी शुरू की है।

खनन माफियों के खिलाफ खोला था मोर्चा
दुर्गा शक्ति नागपाल ने दो सप्ताह में करीब 40 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई और उनमें 15 से 20 लोगों को जेल पहुंचवाया था। जबकि करीब 300 ट्रक और ट्रैक्टरों को सीज कर खनन पर रोक लगा दी थी। जिससे सरकार को तत्काल 82.43 करोड़ का राजस्व भी मिला था।

इस कार्रवाई से माफिया डर गए और उन्होंने एक सपा नेता के माध्यम से शासन में उनके तबादले की सिफारिश कराई लेकिन ईमानदार छवि को लेकर पंचम तल के अफसरों ने भी हाथ डालना उचित नहीं समझा और जैसे ही कादलपुर गांव में धार्मिक स्थल गिराने की बात आई तो उन्हें इसी की चपेट में ले लिया।

क्या था पूरा मामला

Modi government changed rules for IPS Durga Shakti

पंजाब केडर की आइएएस दुर्गाशाक्ति नागपाल 2009 में पंजाब कैडर में सलेक्ट हुई थीं। उनकी यूपी के अभिषेक सिंह से शादी हुई और उसके बाद उन्होंने खुद को यूपी सरकार के समक्ष आवेदन किया था कि उन्हें यूपी कैडर में शिफ्ट कर लिया जाए।

यूपी कैडर में आने के बाद दुर्गाशक्ति नागपाल को दूसरी तैनाती गौतमबुद्धनगर में सदी तहसील की एसडीएम नियुक्त किया था। उन्होंने कुछ ही दिनों में बालू माफिया के खिलाफ अभियान चलाया था।

माफिया के खिलाफ चलाए गए अभियान को लेकर शासन तक उनकी शिकायत कर दी गई थी। माफिया को चाहिए था तो बस एक मौका और 25 जुलाई को एसडीएम दुर्गा शक्ति नागपाल को एक सूचना मिली कि कादलपुर गांव में एक धार्मिक स्थल बनाया जा रहा है।

सूचना पर वह पुलिस और अपने स्टाफ के साथ कादलपुर पहुंची तो उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वह दीवार को स्वयं हटा लें और धार्मिक स्थल की अनुमति ले लें भले ही पुन: यहीं पर बना ले।

गांव के कुछ लोगों ने स्वयं दीवार को हटाया था लेकिन शाम होत-होते दुर्गाशक्ति नागपाल के खिलाफ शिकायत कर दी गई कि उन्होंने एक धार्मिक स्थल की दीवार ढहा दिया। इस जानकारी के आधार पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनका निलंबन करा दिया। हालांकि दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन से चंद दिन पहले 23 जुलाई को खनन माफिया ने खनन अधिकारी रहे आशीष कुमार का भी तबादला करा दिया था।

एसडीएम पर निलंबन की कार्रवाई को लेकर क्षेत्र के लोगों ने आंदोलन किया था और उनके निलंबन को वापस करने की भी मांग की थी लेकिन प्रदेश सरकार ने एक न सुनी और उन्हें पंचम तल से अटैच कर लिया गया। अमर उजाला ने एसडीएम के निलंबन के बाद खबर प्रकाशित की थी कि डीएम पर भी जल्द गाज गिरेगी और ठीक 52 दिन बाद जिलाधिकारी रविकांत सिंह का तबादला कर दिया गया।

क्या है बालू खनन
जिले में यमुना और हिंडन नदी में अवैध खनन माफिया का दबदबा है। इससे जहां माफिया को हर रात पांच से 10 लाख रुपये की आमदनी होती है वहीं सरकार को इसकी हानि होती थी। बालू खनन से सरकार को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है और साथ ही पर्यावरण पर भी खराब असर पड़ता है।

प्रशासन माफिया के दबाव और राजनीतिक दखल के चलते उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं पर पाता है। जिससे हर साल अफसरों के न चाहते हुए भी लाखों-करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि सहनी पड़ती है।

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