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केंद्र ने माना, चुनाव में होता है धन-बल का प्रयोग

Fri, 30 Nov 2012 11:33 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 30 Nov 2012 11:33 PM IST
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center govt says there is use of money force in elections

केंद्र सरकार ने माना है कि चुनाव में धन और बल का गलत इस्तेमाल होता है। इसे रोकने के लिए सरकार जल्द ही ठोस कदम उठाने जा रही है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव की सख्त जरूरत को समझते हुए भी राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे पर आम सहमति नहीं बना पा रही हैं। इस मामले से जुड़ी जटिलताओं के चलते सरकार इसके लिए समय सीमा नहीं तय कर पा रही है।

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चुनाव प्रक्रिया की कमियों के चलते होने वाली धांधलियों की चर्चा करते हुए कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि सरकार ने चुनाव प्रक्रिया सुधार की दिशा में पहले भी पहल कर दिया है, लेकिन आम सहमति नहीं बन पाने की वजह से उसे अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका है।
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एफडीआई पर अवरोध के चलते एक सप्ताह से अधिक समय बाद राज्यसभा में शुरू हुई कार्यवाही के दौरान शुक्रवार को भाजपा सांसद भूपेंद्र यादव ने निजी विधेयक पेश कर चुनाव सुधार और चुनाव में हो रही धांधली को खत्म करने के लिए सदन से गुजारिश की। भूपेंद्र सिंह ने सदन से कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में नैतिकता का मुख्य स्थान होना चाहिए, लेकिन चुनाव में पैसे और ताकत की प्रधानता से भारत का नाम बदनाम हो रहा है। इसकी वजह चुनाव प्रक्रिया में दोष और सरकार की गंभीरता में कमी है।
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इस निजी विधेयक का जवाब देते हुए कानून मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि इस दिशा में कई अहम कदम उठाए जा चुके हैं। अश्विनी कुमार के मुताबिक चुनाव में राजनीतिक फंडिंग की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी कई योजनाओं पर काम चल रहा है। विधेयक के समर्थन में समाजवादी पार्टी सांसद अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि सरकार कानूनन यह अनिवार्य कर दे कि 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को वोट डालना ही पड़ेगा। सिंह के मुताबिक यह चुनाव सुधार की दिशा में अहम कदम होगा, क्योंकि अभी मुश्किल से 40 से 50 फीसदी लोग ही वोट डालते हैं।

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