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‘दवा परीक्षण से हुई मौतों की जिम्मेदार केंद्र सरकार’
नई दिल्ली/पीयूष पांडेय
Updated Tue, 19 Feb 2013 12:54 AM IST
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दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल से होने वाली मौतों के लिए कांग्रेस शासित राज्य आंध्र प्रदेश ने केंद्र को जिम्मेदार ठहराया है। सर्वोच्च अदालत में दायर हलफनामे में प्रदेश सरकार ने कहा है कि इस संबंध में राज्य सरकार को कोई सूचना नहीं दी जाती है और इसे मंजूरी केंद्र की ओर मिलती है। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एंड कॉस्मेटिक अधिनियम में कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं है। किरण रेड्डी सरकार ने अधिनियम को सख्त बनाने के अलावा राज्यों को भी अधिकार देने की मांग की।
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बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों द्वारा बिना किसी रोक-टोक आम लोगों पर दवाइयों के परीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की थी और सभी राज्य सरकारों से हलफनामा दाखिल करने को कहा था। आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुख्य सचिव केआर किशोर ने हलफनामे में कहा है कि क्लीनिकल ट्रायल के मसले पर हमारे देश में समुचित कानून नहीं है।
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गैरकानूनी ट्रायल करने वालों के खिलाफ 1940 में बने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक अधिनियम के तहत कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती। राज्यों को इस संबंध में कोई अधिकार प्राप्त नहीं है। यहां तक की केंद्र की ओर से राज्यों और उसके लोगों पर किए जाने वाले ट्रायल की सूचना तक नहीं दी जाती। ऐसे में यह जरूरी है कि अधिनियम को सख्त किया जाए और राज्यों और केंद्रीय दवा नियंत्रण प्रशासन को इस कारगुजारी पर अंकुश लगाने का अधिकार दिया जाए।
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प्रदेश सरकार ने राज्य में इन ट्रायलों के दौरान लोगों के मरने की याचिका पर सफाई देते हुए कहा है कि खम्माम जिले में 4 लड़कियों की मौत एचपीवी वैक्सीन से नहीं हुई थी। हालांकि सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए 14 हजार लड़कियों पर वैक्सीन के सर्वेक्षण को स्वीकार किया है।
गौरतलब है कि सर्वोच्च अदालत ने केंद्र की ओर से दायर किए गए जवाब पर बेहद तल्ख लहजे में कहा था कि सरकार अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए वापस आ सकती है लेकिन ऐसे परीक्षणों में जान गंवाने वाले व्यक्तियों का क्या होगा। जान गंवाने वाले व्यक्ति तो वापस नहीं आ सकते हैं।