भारत में तेंदुओं की नहीं है बाघ जैसी 'हालत', जानिए उनका हाल
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बाघ और शेरों के बाद सबसे ज्यादा प्रचलित जानवर तेंदुओं की आबादी के बारे में भारत के पास नया अनुमान हुआ है। पहली बार देश भर में तेंदुओं की गिनती की गई जिसमें देश के अलग-अलग हिस्सों में इनकी आबादी 12 से 14 हजार के बीच अनुमानित की गई है।
इनकी आबादी जानने के लिए भी वही तरीका अपना गया है जो बाघों की आबादी जानने के लिए अपनाया जाता है। जिसमें कैमरा ट्रैपिंग के सहारे जानवरों के फोटो लिए जाते हैं और उनकी उपस्थिति के बारे में अन्य जानकारियां इकट्ठा की जाती है।
टाईगर सेंसस में लीड साइंटिस्ट यादवेंद्र देव वी. झाला के मुताबिक जो क्षेत्र हमने कवर कर रखे थे उसके बाहर तेंदुए थे। संख्या के आधार पर देखें तो हमारा अनुमान है कि पूरे भारत में 12 से 14 हजार की संख्या में तेंदुओं की आबादी है।
लेकिन 10 से 45 हजार का था अनुमान
झाला ने बीते सप्ताह देहरादून में हुए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया एनुअल रिसर्च सेमिनार में उन्होंने तेंदुओं की यह संख्या बताई थी। जब तक ये आंकड़े सामने नहीं आए थे, तब तक यह अनुमान लगाया जा रहा था कि इनकी संख्या 10 हजार से 45 हजार के बीच होगी।
इनकी जनसंख्या पता करने के लिए 3 लाख 50 हजार स्क्वॉयर किलोमीटर का क्षेत्र कवर किया गया था जिसमें शिवालिक की पहाड़ियां, गंगा के मैदान, मध्य भारत और पश्चिमी घाट शामिल थे।
इस दौरान कैमरा ट्रैपिंग के माध्यम से 17,143 फोटो खीचीं गईं, जिसमें 1,647 तेंदुए पाए गए। इस प्रक्रिया में लो ग्रेड रेवेन्यू जंगलों को भी शामिल किया गया। इस अध्य्यन में यह पता चला कि यह प्रजाति पूरे भारत में फैली हुई है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि देश में इनकी आबादी की सेहत बिल्कुल ठीक है।
नहीं करना होगा समस्या का समाना
झाला ने अंग्रेजी अखाबर The Times Of India को बताया कि कुल आबादी में अधिकतर तेंदुए स्वस्थ अनुवंश से हैं और इन्हें भारतीय बाघों में हुई प्लेग जैसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
वाइल्ड लाइफ बायोलॉजिस्ट ने कहा कि इससे पहले हमारे पास ऐसा कोई अनुमान नहीं था। यह भी संभव नहीं था कि तेंदुओं की आबादी बढ़ने या घटने की जानकारी मिल सके।
लेकिन तेंदुओं की हालत भारतीय बाघों से बहुत बेहतर है क्योंकि वे झाड़ियों में भी रह सकते हैं और उन जंगलों में भी रह सकते है जहां इंसान का प्रभाव है।
नहीं शामिल है भारत के कुछ हिस्से
वाइल्ड लाइफ बायोलॉजिस्ट ने बताया कि इसकी एक वजह और है कि वे बाघों की तरह खतरनाक नहीं है। इस प्रजाति की संख्या सबसे 1,817 तेंदुओं के साथ सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में है। उसके बाद कर्नाटक में 1,129, महाराष्ट्र में 905, छत्तीसगढ़ में 846, तमिलनाडु में 815, तेंदुओं की आबादी अनुमानित की गई है।
इन सबके बाद उत्तराखंड भी एक ऐसा राज्य है जहां अनुमान लगाया जा रहा है कि यहां तेंदुओं की संख्या 703 तक है। तेंदुओं की आबादी पता करने के लिए किए गए इस अध्ययन में गुजरात, राजस्थान और पूर्व भारत के कुछ हिस्से, और पूरा पूर्वोत्तर शामिल नहीं किया गया है।