क्रीम से गोरे न हुए तो शाहरुख पर करें केस!
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हफ्ते भर में गोरा और महीने भर में काले, घने घुंघराले बालों का दावा करने वाले विज्ञापनों की अब खैर नहीं है। और ऐसे उत्पादों को प्रचार कर रहे सितारों की भी मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।
केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय ऐसे विज्ञापनों पर नजर रखने के लिए एक मॉनिटरिंग पैनल बनाने पर विचार कर रहा है।
ये मॉनिटरिंग पैनल कैसा होगा? इसके पास क्या आधिकार होंगे? इन मुद्दों पर सुझाव देने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता सरंक्षण परिषद ने एक सब कमेटी का गठन करने का फैसला किया है। कमेटी का गठन सप्ताह भर के भीतर कर लिया जाएगा।
विभा भार्गव आयोग की थी सिफारिश
केंद्रीय मंत्री केवी थॉमस की अध्यक्षता में सोमवार को कोच्ची में हुई केंद्रीय उपभोक्ता सरंक्षण परिषद की कांफ्रेंस में ऐसे विज्ञापनों पर रोक लगाने की मांग जोरशोर से उठी।
परिषद के सदस्य जोसेफ विक्टर ने बताया कि कांफ्रेंस में भ्रामक विज्ञापनों विशेष कर खाद्य पदार्थ, तेल और स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों के बारे में विस्तार से चर्चा हुई। ये बात जोरशोर से उठी की भ्रामक उत्पादों के विज्ञापनों पर नजर रखी जाए और शिकायत आने पर इनका प्रचार कर रही सेलिब्रिटीज के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
उपभोक्त मंत्रालय ने ये निर्णय मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस निर्णय को ध्यान में रख कर लिया है, जिसमें उसमें विभा भार्गव आयोग की सिफारिशों को मानते हुए भ्रामक विज्ञापनों की जांच के लिए पैनल बनाने को आदेश दिया था।