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मोदी कैसे रख रहे अपने मंत्रियों पर नजर?

Sat, 23 Aug 2014 12:18 PM IST
Updated Sat, 23 Aug 2014 12:18 PM IST
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cctv camera to missed call modi have an eye on ministers

पीएम मोदी ने अपने मंत्रियों तक को नहीं छोड़ा है। पीएम नरेंद्र मोदी की नजर अपने मंत्रियों पर है इसके कई उदाहरण सामने आ चुके हैं। कई केंद्रीय मंत्रियों को इशारों-इशारों में ही बता दिया गया है कि आप की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

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मोदी सरकार में एक केंद्रीय मंत्री एक बड़े उद्योगपति के साथ खाना खा रहे थे। यह उद्योगपति पीएम नरेंद्र मोदी के भी काफी नजदीकी हैं।

मंत्री महोदय खाना खा ही रहे थे कि मंत्री महोदय के फोन पर एक मिस्ड कॉल आ गई। यह मिस्ड कॉल किसी और की नहीं बल्कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की थी। मंत्री महोदय ने जैसे ही मिस्ड कॉल देखी तुरंत अपनी मीटिंग को खत्म करकें अपने ऑफिस के लिए निकल गए।
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अपने मंत्रियों के कपड़ो पर भी है नजर

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वहीं एक दूसरा उदाहरण भी जब मंत्रियों को कपड़े तक मोदी की इजाजत से पहनने पड़ रहे हैं। मोदी सरकार में एक मंत्री कुछ महीनों पहले अपनी पहली विदेश यात्रा पर जा रहे थे। वह जहाज पकड़ने के‌ लिए इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट की तरफ बढ़े ही थे कि पीएम मोदी का उनके मोबाइल पर फोन आ गया।

पीएम मोदी ने उनसे बहुत ही सामान्य लहजे में जानकारी ली। मंत्री ने बताया कि मंत्रालय की तरफ से ही मंजूरी मिलने के बाद वो यात्रा पर जा रहे हैं।

पर मंत्री महोदय तब हड़बड़ा गए जब पीएम मोदी ने उनकी जींस पहनने को लेकर सवाल कर दिया। मोदी के इस सवाल का उनके पास जवाब नहीं था। मंत्री महोदय ने इतना सुनते ही तुरंत अपने ड्राइवर को घर वापस चलने के आदेश दिए। मंत्री महोदय घर पहुंचे और फिर नेताओं की पारम्परिक पोशाक कुर्ता-पायजामा पहन कर अपने विदेश यात्रा के लिए रवाना हुए।

पीएम मोदी के डर के चलते कई मं‌त्रियों और नौकरशाहों ने व्यक्तिगत तौर पर मोबाइल का प्रयोग करना बंद कर दिया है। यहीं नहीं मंत्रियों और अधिकारियों ने व्यक्तिगत बातचीत के लिए अपने नौकरों और ड्राइवरों का फोन यूज करना शुरू कर दिया है।

सीसीटीवी कैमरे से रखेंगे मंत्रियों पर नजर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ही मंत्रियों पर नजर रखना शुरू कर दी है। क्या पीएम मोदी को अपने मंत्रियों पर भरोसा नहीं है? पीएम मोदी ने अपने मंत्रियों, अधिकारियों की निगरानी करनी शुरू कर दी है।

फर्स्ट पोस्ट डॉट कॉम के अनुसार पीएम मोदी ने इसके लिए मंत्रालयों में कैमरे लगवाने शुरू कर दिए हैं। 12 अगस्त को पीएम मोदी के दिए बयान से जोड़कर भी इसे देखा जा रहा है कि न खाऊंगा और न ही खाने दूंगा। साथ ही यह संदेश दे चुके हैं कि भ्रष्‍टाचार को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इसको देखते हुए पहली बार मंत्रालयों में सीसीटीवी कैमरा लगाए जा रहे हैं। इसकी शुरूआत पेट्रोलियम मंत्रालय से शुरू कर दी गई है। गौरतलब है कि पेट्रोलियम मंत्रालय का सबसे धनवान मंत्रालयों में से एक माना जाता है, यहां पर अरबों रुपए के सौदे होते हैं या फिर इनसे संबंधित आर्डर पास किए जाते हैं।

प्रस्ताव के अनुसार पेट्रोलियम मंत्रालय के मुख्यालय शास्‍त्री भवन में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। जल्‍द ही यहां पर सीसीटीवी कैमरे लग चुके होंगे। अभी इसे एक पॉयलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है। बाद में और अधिक मंत्रालयों में इसे लागू किया जाएगा। इस लिस्ट में जिन मंत्रालयों के नाम हैं उनमें अगला नंबर रक्षा मंत्रालय का भी है।

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पीएमओ की देखरेख में तैयार हो रहे है कैबिनेट नोट

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पीएम मोदी का हस्तक्षेप सिर्फ यहीं तक नहीं है बल्कि इससे आगे तक पहुंच चुका है। पीएम मोदी के इशारे पर ही सारे मंत्रालय काम कर रहे हैं। मंत्रिमंडल की होने वाली बैठक में पेश किए जाने वाले कैबिनेट नोट पूरी तरह से पीएमओ की देखरेख में तैयार किए जा रहे हैं।

पीएमओ की तरफ से जारी किए गए निर्देशों के मुताबिक कैबिनेट नोट तैयार करने से पहले पीएमओ की राय जरूर ली जाए। इससे साफ होता है कि किस कदर मोदी सरकार की ‌मर्जी के बगैर कोई भी मंत्रालय कोई निर्णय नहीं ले सकता है। कैबिनेट मीटिंग के लिए तैयार होने वाले कैबिनेट नोट को पीएमओ ही तैयार कर रहा है।

पीएम मोदी ने मांगा विज्ञापनों का ब्यौरा

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सरकारी ‌एजेंसी डीएवीपी की तरफ से जारी किए गए विज्ञापन पर पीएमओ की नजर पड़ गई है। पीएमओ ने डीएवीपी से जानकारी मांगी है कि पिछले 10 वर्षों के दौरान किन मीडिया संस्‍थानों को कितनी राशि के विज्ञापन जारी किए गए हैं?

पीएमओ की तरफ मांगी गई जानकारी के अनुसार यूपीए शासनकाल में डीएवीपी किस तरह से विज्ञापनों को जारी करता था। साथ ही पीएमओ यह जानना चाहता है कि किस मीडिया माध्यम में यह राशि खर्च की गई।

जानकारों का मानना है कि पीएमओ की तरह से जारी किए गए यह निर्देश सीधे तौर पर सीधे तौर पर कई समाचार पत्रों पर काबू पाने के तौर पर किया जाएगा। यह आदेश मेनस्ट्रीम में काम करने वाले समाचार पत्रों के लिए बुरे साबित हो सकते हैं।

क्योंकि कई समाचार पत्र जिसमें कई प्रमुख और बड़े समाचार पत्र भी है जो सीधे तौर पर सरकार विज्ञापनों पर ही निर्भर करते हैं। अगर सरकार ने कुछ कड़े निर्णय ले लिए तो सीधे तौर पर दो अंग्रेजी समाचार पत्र पर काफी असर पड़ेगा या फिर यह अखबार बंद भी हो सकते हैं।

इसके से एक अंग्रेजी अखबार जो भाजपा का समर्थक भी रहा है। साथ ही अपने संपादकीय में बीजेपी का पक्ष लेता रहा है। पर पीएम मोदी के हाथ में सत्ता आने के बाद से अब चीजें बदल गई हैं।

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