फीस पर मनमानी के खिलाफ सख्त सीबीएसई बोर्ड

नई दिल्ली/पीयूष पांडेय Updated Mon, 17 Dec 2012 11:19 PM IST
cbse board hard against arbitrary fees
मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने वाले प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) शिकायत मिलने पर तत्काल सख्त कदम उठाएगा। बोर्ड के मुताबिक देशभर में किसी भी शिकायत को अनदेखा नहीं किया जाता। चाहे वह मामला शिक्षा के अधिकार के तहत निशुल्क शिक्षा का हो या फिर उसकी ओर से मान्यता प्राप्त स्कूल की मनमानी का। बोर्ड के नियम के मुताबिक गैर सहायता प्राप्त स्कूल बिना अभिभावक प्रतिनिधि मंडल की सलाह के फीस नहीं बढ़ा सकते।

शैक्षणिक वर्ष के बीच में तो फीस की बढ़ोत्तरी किसी भी सूरत में नहीं की जा सकती। वहीं सहायता प्राप्त, सरकारी व बोर्ड से मान्यता प्राप्त अन्य स्कूल केंद्र और राज्य सरकार के शिक्षा बोर्ड की ओर से तय की गई फीस ही वसूल सकते हैं। बोर्ड के मुताबिक इस मामले में अनियमितता बरते जाने पर स्कूल की मान्यता को तत्काल रद्द कर दिया जाएगा।

सीबीएसई ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में कहा है कि देश भर में बोर्ड से मान्यता प्राप्त कोई भी स्कूल में ‘कैपीटेशन फीस’ या ‘वॉलैंटरी डोनेशन’ प्रवेश के नाम पर नहीं ले सकता। प्रवेश के लिए तय फीस के सिवा अन्य किसी भी इरादे से कोई शुल्क नहीं वसूला जा सकता।

आरटीआई कार्यकर्ता गौरव अग्रवाल की ओर से मांगी गई सूचना के जवाब में स्पष्ट किया गया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने की शिकायत मिलने पर बोर्ड संस्थान के खिलाफ कड़े कदम उठाएगा। मामला सही पाए जाने पर मान्यता को भी तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही बोर्ड ने कहा है कि शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने के संबंध में निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके तहत राज्य सरकारों को शिक्षा का अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (रेपा) गठित कर गड़बड़ी करने वाले स्कूलों की छानबीन करने की सलाह दी गई है।

बोर्ड ने कहा है कि आरटीआई अधिनियम की धारा 31 और 32 के तहत अधिसूचित क्षेत्रीय प्राधिकार को स्कूलों के खिलाफ मिलने वाली शिकायतों का निपटारा करना है। यह निपटारा तीन माह में किया जाना है। इन शिकायतों के खिलाफ अपील को राज्य या केंद्र बाल संरक्षण आयोग के समक्ष दाखिल किया जाएगा।

यह शिकायतें सरकारी कार्यालय, लोक सेवक, निजी संस्थान, निजी व्यक्ति या अन्य किसी एजेंसी के खिलाफ हो सकती हैं, जो आरटीआई के प्रावधानों को सीधे या अप्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित कर रहा हो। क्षेत्रीय प्राधिकार उसके खिलाफ कदम उठा सकता है। यदि प्राधिकार के आदेश के खिलाफ अपील की जाती है तो आयोग उसका निपटारा करेगा। याद रहे कि आरटीआई कानून को सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी और गैरसरकारी स्कूलों में समान रूप से लागू करने का फैसला दिया था।

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