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RTI कार्यकर्ता जेठवा की हत्या की होगी सीबीआई जांच
अहमदाबाद/एजेंसी
Updated Wed, 26 Sep 2012 01:26 AM IST
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गुजरात पुलिस की तीखी आलोचना करते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने आरटीआई कार्यकर्ता अमित जेठवा की हत्या की सीबीआई जांच का आदेश दिया है। मंगलवार को जस्टिस डीएच वाघेला और जस्टिस जेसी उपाध्याय ने अमित जेठवा के पिता भीकाभाई जेठवा की मांग से सहमति जताते हुए सीबीआई जांच का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने सीबीआई से जांच छह महीने के अंदर पूरी करने को भी कहा।
मामले के मुताबिक आरटीआई कार्यकर्ता जेठवा की 20 जुलाई, 2010 को गुजरात हाईकोर्ट के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जेठवा ने गिर वन क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ एक जनहित याचिका और कई आरटीआई आवेदन दायर किए थे। हाईकोर्ट ने माना कि गुजरात पुलिस की जांच संतोषजनक नहीं है, इसलिए अदालत को मामले की तफ्तीश सीबीआई को सौंपनी पड़ रही है।
पीठ ने मामले की जांच में अब तक शामिल रहे अधिकारियों को सीबीआई से सहयोग करने के लिए कहा है। अदालत ने जांच अधिकारी से जांच से संबंधित सभी दस्तावेज दस दिन के अंदर सीबीआई को मुहैया कराने के भी निर्देश दिए। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद सरकारी वकील ने अदालत से तीन सप्ताह का स्टे देने की अपील की, ताकि फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी जा सके। लेकिन पीठ ने इस अपील को खारिज कर दिया।
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भीकाभाई ने हाईकोर्ट में अपील दायर करते हुए कहा था कि पुलिस सही तरह से मामले की जांच नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके बेटे की हत्या में जूनागढ़ से भाजपा सांसद दीनू सोलंकी का हाथ है और पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। पुलिस ने जांच में सोलंकी को क्लीन चिट दे दी थी। गुजरात पुलिस ने इस मामले में दीनू सोलंकी के भतीजे शिवा सोलंकी और शूटर शैलेश पांड्या समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया था। पांड्या ने ही जेठवा पर गोली चलाई थी।
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मामले के मुताबिक आरटीआई कार्यकर्ता जेठवा की 20 जुलाई, 2010 को गुजरात हाईकोर्ट के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जेठवा ने गिर वन क्षेत्र में अवैध खनन के खिलाफ एक जनहित याचिका और कई आरटीआई आवेदन दायर किए थे। हाईकोर्ट ने माना कि गुजरात पुलिस की जांच संतोषजनक नहीं है, इसलिए अदालत को मामले की तफ्तीश सीबीआई को सौंपनी पड़ रही है।
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पीठ ने मामले की जांच में अब तक शामिल रहे अधिकारियों को सीबीआई से सहयोग करने के लिए कहा है। अदालत ने जांच अधिकारी से जांच से संबंधित सभी दस्तावेज दस दिन के अंदर सीबीआई को मुहैया कराने के भी निर्देश दिए। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद सरकारी वकील ने अदालत से तीन सप्ताह का स्टे देने की अपील की, ताकि फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी जा सके। लेकिन पीठ ने इस अपील को खारिज कर दिया।
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भीकाभाई ने हाईकोर्ट में अपील दायर करते हुए कहा था कि पुलिस सही तरह से मामले की जांच नहीं कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके बेटे की हत्या में जूनागढ़ से भाजपा सांसद दीनू सोलंकी का हाथ है और पुलिस उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है। पुलिस ने जांच में सोलंकी को क्लीन चिट दे दी थी। गुजरात पुलिस ने इस मामले में दीनू सोलंकी के भतीजे शिवा सोलंकी और शूटर शैलेश पांड्या समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया था। पांड्या ने ही जेठवा पर गोली चलाई थी।