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पिंजरे से आजादी के लिए दबाव बनाएगा ‘तोता’
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Mon, 05 Aug 2013 12:02 AM IST
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सीबीआई रूपी ‘तोते’ पर अंकुश बनाए रखने की सरकार की मंशा को देखते हुए देश की शीर्ष जांच एजेंसी अब पिंजरे से आजाद होने के लिए अड़ गई है।
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जांच एजेंसी सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान अपने हलफनामे में स्वायत्तता की मांग को जायज और वैध ठहराएगी। इससे उसकी मांग को कानूनी जामा पहनाने का रास्ता साफ होगा।
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उल्लेखनीय है कि दो अगस्त को सरकार ने सर्वोच्च अदालत के समक्ष हलफनामा पेश करके बगैर जवाबदेही के सीबीआई निदेशक को ज्यादा ताकतवर बनाने के प्रस्ताव का विरोध किया है।
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जांच एजेंसी में उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि सीबीआई के प्रस्ताव के मुताबिक लालफीताशाही में कटौती करते हुए निदेशक को कई मंत्रालयों की जगह सिर्फ कार्मिक एवं प्रशिक्षण मंत्रालय को ही रिपोर्ट करना होगा।
सूत्रों का कहना है कि सीबीआई जवाबदेही की अहमियत समझती है। इसीलिए तय समय पर अपनी जांच को पूरा करने के लिए और ज्यादा स्वायत्तता दिए जाने की मांग कर रही है। हालांकि शीर्ष अदालत के समक्ष स्वायत्तता के मुद्दे पर ही एजेंसी और सरकार में ठन गई है।
केंद्र ने कहा है कि बगैर नियंत्रण और संतुलन के अधिकार प्राप्त निदेशक के निरंकुश होने का खतरा रहेगा। सरकार ने जांच एजेंसी के निदेशक के कार्यकाल को दो वर्ष के बजाय कम से कम तीन साल करने के प्रस्ताव का भी विरोध किया है।
एजेंसी ने इसी तरह केंद्र सरकार में सचिव स्तर के वित्तीय अधिकार दिए जाने समेत आर्थिक स्वायत्तता की भी मांग की है। जिस पर सरकार ने केंद्रीय पुलिस सेवाओं में महानिदेशक के बराबर का अधिकार दिए जाने की वकालत की है।