काला धन: 59 कंपनियों के ठिकानों पर CBI ने मारे छापे
बैंक ऑफ बड़ौदा के दिल्ली में अशोक विहार शाखा से करीब 6000 करोड़ रुपये का कालाधन हांगकांग भेजने संबंधी मामले में सीबीआई ने रविवार को 50 स्थानों पर छापेमारी की।
कई स्थानों की तलाशी के साथ ही सीबीआई ने अपने मुख्यालय में मामले से जुड़े कई संदिग्धों से पूछताछ भी की। यह छापेमारी उन 59 कंपनियों के पते पर की गई, जिनके बैंक खातों के जरिए कालाधन हांगकांग भेजा गया।
इन 59 खाताधारक कंपनियों की ओर से बैंक में उपलब्ध कराए गए ज्यादातर पते गलत पाए गए हैं, मगर सीबीआई ने मामले से जुड़े कई संदिग्धों की पहचान कर ली है।
उल्लेखनीय है कि इस मामले के खुलासे के बाद सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने अलग-अलग मामला दर्ज किया था। संबंधित बैंक शाखा तब संदेह के दायरे में आयी जब इस शाखा से विदेशी मुद्रा के लेन-देन का कारोबार अचानक 500 गुना बढ़ गया। बीते 1 अगस्त 2014 से 12 अगस्त 2015 के बीच बैंक की इस शाखा से 8 हजार 667 बार विदेशी मुद्रा का लेन-देन हुआ।
खासबात यह है कि दिन में एक खाते से 20 बार विदेशी मुद्रा का लेन-देन होने और एक बार में ही लाखों के लेन-देन के बावजूद शाखा ने खाताधारक कंपनी का पैन नंबर लेने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
संदिग्धों से घंटों पूछताछ
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े कई संदिग्धों की पहचान कर ली है। इनमें से कई से सीबीआई मुख्यालय में गहन पूछताछ हुई है।
जांच एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि इस मामले में भारत और हांगकांग में कौन कौन जुड़े हैं। इस क्रम में अशोक विहार शाखा के तत्कालीन प्रबंधक एसके गर्ग और एक कंपनी फॉरेक्स का काम देखने वाले जैनेश दुबे से भी पूछताछ हुई है। मामले से जुड़े बैंक के कुछ अधिकारी फरार हो गए हैं।
रविवार की छापेमारी में सीबीआई को कुछ अहम दस्तावेज हाथ लगे हैं। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि दस्तावेजों के अध्ययन के बाद कई और नाम सामने आएंगे। जांच एजेंसी की रविवार की कार्रवाई के बारे में सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि 59 खाता धारकों, कुछ ज्ञात और अज्ञात बैंक कर्मचारियों और कुछ निजी व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद कुछ ठिकानों पर छापे मारे गए।
प्रवक्ता के मुताबिक इनके खिलाफ धारा 120 बी, धारा 420 और भ्रष्टाचार रोधी कानून 1988 की धारा 13(1) और 13 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय ने इनके खिलाफ फेमा के तहत मामला दर्ज किया है।
अब तक की जांच के मुताबिक काजू और चावल के आयात के लिए अग्रिम रकम हांगकांग के जरिए भेजे जाने की खाताधारकों का दावा झूठा साबित हुआ है। इस दौरान रकम तो भेजी गई, मगर इसके बदले किसी वस्तु का आयात नहीं हुआ।
खाताधारकों ने बड़ी रकम बाहर भेजने पर संदेह और ऐसे मामलों को पकड़ने के लिए तैयार किए गए सॉफ्टवेयर से बचने के लिए एक बार में एक लाख डॉलर से कम रकम भेजी।
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक दस्तावेजों के अध्ययन के बाद सोमवार को भी संदिग्धों और आरोपियों के कुछ ठिकानों पर छापेमारी के साथ पूछताछ कर सकती है।