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कोल घोटालाः पीएम के बयान से मुश्किल में सीबीआई
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 21 Oct 2013 12:51 PM IST
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कोयला घोटाला मामले में केएम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारिख के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई अब खुद ही मुसीबत में फंस गई है।
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कंपनी हिंडाल्को को तालावीरा-2 कोयला ब्लॉक दिए जाने को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बचाव के बाद सीबीआई के लिए इस मामले में आगे बढ़ना मुश्किल हो गया है।
प्रधानमंत्री ने इस विवादित आवंटन के फैसले को बिल्कुल सही बताया है। उन्होंने कहा कि हिंडाल्को को मैरिट के आधार पर कोल ब्लॉक मिला है। जबकि सीबीआई का आरोप है कि बिड़ला और पारिख की मिलीभगत से सिर्फ सार्वजनिक उपक्रम की कंपनियों (पीएसयू) को दिए जाने वाले तालावीरा-2 कोयला ब्लॉक को निजी कंपनी हिंडाल्को को अनुचित रूप से आवंटित किया गया।
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पारिख पर बिड़ला समूह की कंपनी के लिए अपने पद का दुरुपयोग करने का आरोप है।
इसके बाद से सीबीआई वापस कदम खींचने या आगे बढ़ने को लेकर दुविधा में पड़ गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार सीबीआई जल्दी में जांच प्रक्रिया बंद नहीं कर सकती। इस संबंध में इससे जुड़े लोगों से बातचीत की जाएगी। हालांकि जांच बंद का करने का विकल्प खुला है।
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सीबीआई का कहना है कि एफआईआर प्राथमिक प्रक्रिया है और एजेंसी ने कई बार शुरू की गई जांचें बंद की हैं। लेकिन इस संबंध में कानूनी सलाह लेने के बाद ही कोई फैसला करेगी।
एक वरिष्ठ सीबीआई अधिकारी के मुताबिक पीएसयू और हिंडाल्को के बीच संयुक्त उपकम निजी कंपनी के फायदा के लिए किया गया था और इसमें कानून का उल्लंघन हुआ है। लेकिन इसमें कोई आपराधिक मामला बनता है या नहीं इस संबंध में कानूनी सलाह ली जाएगी। अगर केएम बिड़ला, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड और पीसी पारेख के खिलाफ कुछ नहीं मिलता है तो केस बंद कर दिया जाएगा।
उद्योगपतियों और राजनेताओं का भी दबाव
एफआईआर दर्ज होने के बाद से बड़े-बड़े उद्यागेपतियों से लेकर राजनेता तक इसके विरोध में उतर आए थे। इसे कारोबार का माहौल बिगाड़ने वाला फैसला करार दे दिया गया था। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी जोरदार तरीके से इसका विरोध किया।
प्रधानमंत्री ने पूरी तरह से संतुष्टि दिखाई की हिंडाल्को को जिन मेरिट के आधार पर कोल ब्लॉक आवंटित किए गए वे पुख्ता थे।
सीबीआई का आरोप था कि ओडिशा के तालबीरा-2 कोल ब्लॉक आवंटन में नियमों की अनदेखी हुई और स्क्रीनिंग कमिटी के फैसले पलटा गया लेकिन पीएमओ का कहना है कि सिफारिशें पलटने का फैसला ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के कहने पर और राज्य में रोजगार उत्पन्न करने के लिए बदला गया।