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बेहिसाब संपत्ति मामले में मायावती को झटका

Thu, 02 May 2013 12:12 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 02 May 2013 12:12 AM IST
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cbi free to probe mayawati assets case says supreme court

आय से अधिक संपत्ति मामले में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीबीआई इस मामले में बसपा सुप्रीमो के खिलाफ जांच करने के लिए स्वतंत्र है।

सर्वोच्च अदालत ने हालांकि मायावती को क्लीन चिट देने के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका पर बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

जस्टिस जीएस सिंघवी व जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ ने गत वर्ष 6 जुलाई को बसपा सुप्रीमो के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी थी, जबकि बुधवार को पीठ ने कहा कि पहले जो आदेश दिया गया था, उसमें मायावती के संपत्ति मामले की योग्यता पर विचार नहीं किया गया था।

पीठ ने कहा कि संपत्ति मामले में दर्ज एफआईआर को इसलिए रद्द किया था क्योंकि एजेंसी ताज कॉरिडोर मामले में अदालत के आदेश को पूरी तरह से समझे बगैर ही मायावती के खिलाफ कार्यवाही कर रही थी।
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अदालत ने साफ किया कि फैसले में मायावती के खिलाफ संपत्ति मामले को अलग से आगे बढ़ाए जाने के सीबीआई के अधिकार को छीना नहीं गया था।

पीठ ने कहा कि सीबीआई मायावती के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच कर सकती है और गत वर्ष इस मसले पर दिए फैसले को स्पष्ट करने के लिए अदालत आदेश जारी करेगी।
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इससे पहले सर्वोच्च अदालत ने सीबीआई से पूछा कि इस मामले में उसे स्पष्टीकरण की जरूरत है या नहीं। जवाब में एजेंसी ने कहा कि यह साफ होना जरूरी है कि अदालत ने सिर्फ इस मामले की एफआईआर को रद्द किया था या जांच करने पर ही रोक लगा दी थी।

गत वर्ष 6 जुलाई के फैसले पर दायर पुनर्विचार याचिका पर आदेश सुरक्षित करते हुए पीठ ने यह भी कहा कि संपत्ति मामले में एजेंसी की जांच में सामने आए तथ्यों पर अदालत गौर करेगी।

वहीं, मायावती की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एससी मिश्र ने पुनर्विचार याचिका का विरोध करते हुए कहा कि फैसला पूरी तरह स्पष्ट था और इस मामले में स्पष्टीकरण की कोई जरूरत नहीं है।

हालांकि पीठ ने उनके तर्क को अस्वीकार कर दिया। सर्वोच्च अदालत में इस मसले पर उत्तर प्रदेश के कमलेश वर्मा की ओर से पुनर्विचार याचिका दायर की गई है जो हाईकोर्ट में इस मामले में आवेदक थे। लेकिन शीर्ष अदालत ने गत वर्ष फैसला देने से पहले उनके पक्ष को नहीं सुना था।

वर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण ने कहा कि सीबीआई को राज्य सरकार या अदालत की ओर से जब तक मंजूरी नहीं मिलेगी। वह कैसे जांच करेगी। ऐसे मसलों पर तो अदालतों को सक्रिय भूमिका निभानी पड़ती है।

सीबीआई का दिखा ढुलमुल रवैया
मायावती के संपत्ति मामले की सुनवाई में बुधवार को सीबीआई ने बड़ा हल्का पक्ष पेश किया। पीठ ने तीन बार सॉलिसिटर जनरल मोहन पराशरन से पूछा कि एजेंसी का रुख क्या है। पराशरन ने 6 जुलाई के फैसले का जिक्र करते हुए सिर्फ यही कहा कि एजेंसी को सुप्रीम कोर्ट से समर्थन नहीं मिला था।

क्या था गत वर्ष 6 जुलाई का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने बसपा सुप्रीमो मायावती को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ नौ साल से लंबित आय से अधिक संपत्ति का मामला निरस्त करने के साथ ही सीबीआई को आड़े हाथों लिया था।


अदालत ने फैसले में कहा था कि मायावती के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बारे में किसी निर्देश के बगैर ही एजेंसी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर ऐसा किया।

अदालत का आदेश ताज कॉरिडोर प्रकरण में बगैर मंजूरी के यूपी सरकार की ओर से कथित रूप से 17 करोड़ रुपये के भुगतान के मामले तक सीमित था।

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