सीबीआई निदेशक पर फिर लगे गंभीर आरोप
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगे हैं।
जनहित याचिका दायर करने वाले एनजीओ सीपीआईएल ने मंगलवार को आरोप लगाया कि घोटाले से जुड़े लोग सिन्हा के घर जाकर उनसे मिल रहे हैं।
शीर्ष अदालत ने एनजीओ को आदेश दिया है कि वह इस संबंध में बंद लिफाफे में सभी दस्तावेज पेश करे। मामले की अगली सुनवाई बृहस्पतिवार को होगी।
जस्टिस एचएल दत्तू, जस्टिस शरद अरविंद बोबडे और जस्टिस एएम सप्रे की बेंच के समक्ष सीपीआईएल के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि सीबीआई निदेशक के निवास पर रखे विजिटर रजिस्टर से पता चला है कि घोटाले की अभियुक्त कंपनी के कुछ अधिकारी सिन्हा से मिलने आते रहे हैं।
इससे घोटाले की निष्पक्ष जांच पर सवाल उठ रहे हैं। सीबीआई के वकील ने इस रजिस्टर का विवरण खुली अदालत में सार्वजनिक करने पर आपत्ति की।
इस पर बेंच ने भूषण को विवरण पढ़ने से रोकते हुए कहा कि यदि आप इस सामग्री की प्रति हमें, सीबीआई और सीबीआई निदेशक के वकील को मुहैया करा सकें, तो हम मामले पर बृहस्पतिवार को सुनवाई कर सकते हैं।
अधिकारी का नाम सामने आना परेशानी की बात
भूषण ने कहा कि पहले सीबीआई ने घोटाले की जांच कर रहे डीआईजी संतोष रस्तोगी को हटा दिया था और अब सिन्हा से जुड़ा यह नया मामला सामने आया है, जो कि बहुत ही परेशान करने वाली बात है।
वह भी तब, जबकि इस मामले से सिन्हा को अलग रखने की अर्जी लंबित है। मालूम हो कि रस्तोगी को जांच से हटाने के बाद सिन्हा पर मामले में कुछ प्रभावशाली आरोपियों को बचाने के आरोप लगे। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रस्तोगी को जांच टीम में बनाए रखा गया।
वहीं सीबीआई ने एक टेलीकॉम कंपनी के अधिकारियों के उसके निदेशक रंजीत सिन्हा से मिलने के आरोपों को खारिज कर दिया है। सफाई में जारी बयान में जांच एजेंसी ने कहा है कि यह उसकी विश्वसनीयता को प्रभावित करने की साजिश है।
इस बारे में आई एक मीडिया रिपोर्ट को पूरी तरह से गलत, आधारहीन और दुर्भावना से ग्रसित बताते हुए सीबीआई प्रवक्ता ने कहा कि निदेशक के आवास पर कोई भी गेस्ट या विजिटर डायरी है ही नहीं।
प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि सिन्हा के पद संभालने से पहले ही 2जी घोटाले की जांच पूरी कर ली गई थी।