सीबीआई निदेशक को सुप्रीम कोर्ट से एक और झटका
2जी स्पेक्ट्रम मामले में नोटिस जारी किए जाने के ठीक एक दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा से कोयला आवंटन घोटाले में भी आरोपियों को कथित रूप से बचाने के आरोपों पर जवाब तलब किया है।
2जी मामले में भी समान आरोपों पर अदालत पहले ही उन्हें लिखित जवाब देने का निर्देश जारी कर चुकी है।
चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कोयला घोटाला मामले के आरोपियों को कथित रूप से बचाने के मामले में विशेष जांच दल गठित करने, घोटाले की जांच व मुकदमे से अलग रखने के आग्रह पर सीबीआई निदेशक को नोटिस जारी किया।
सर्वोच्च अदालत ने सिन्हा को इन आरोपों पर जवाब देने के लिए हालांकि दस दिन का समय दिया है। लेकिन इस मामले से सिन्हा को हटाने के लिए फिलहाल कोई भी आदेश देने से इनकार कर दिया है। अब अदालत इस मसले पर 19 सितंबर को अगली सुनवाई करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया नोटिस
पीठ ने मामले की सुनवाई शुरू होते ही कहा कि सर्वोच्च अदालत की एक अन्य पीठ पहले ही सिन्हा के खिलाफ आदेश दे चुकी है। इसलिए अब और किसी आदेश की आवश्यकता नहीं है।
लेकिन आवेदक एनजीओ के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि सोमवार को दिया गया आदेश 2जी मामले से संबंधित है। यह कोयला आवंटन मामला है, जिसमें अदालत अलग आदेश दे सकती है। इस पर अदालत ने भूषण के तर्क से सहमति जताई और सिन्हा को नोटिस जारी कर दिया।
पीठ ने इस मामले की सुनवाई 2जी मामले की सुनवाई की तिथि के बाद तय की है। 2जी मामले की सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित है, अदालत सीबीआई निदेशक के जवाब पर गौर करेगी।
आरोपियों को बचाने का आरोप
याद रहे कि एनजीओ ‘कामन काज’ ने आवेदन में कहा है कि सिन्हा के निवास पर रखे प्रवेश रजिस्टर में कोयला प्रकरण में कथित रूप से संलिप्त प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम हैं।
एनजीओ ने आवेदन में सिन्हा पर कोयला घोटाले की जांच को जानबूझकर विफल करने का आरोप लगाया गया। इस मामले में भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोपों में 20 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है।
जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली एक अन्य पीठ ने सोमवार को ही सिन्हा को निर्देश दिया था कि घोटाले में फंसे लोगों से अपने निवास पर मिलने के आरोपों के बारे में सब कुछ साफ-साफ बताएं।