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बदायूं रेप कांड में बड़ा मोड़, CBI की जांच पर उठे ये सवाल

Thu, 29 Oct 2015 01:10 PM IST
Updated Thu, 29 Oct 2015 01:10 PM IST
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cbi closure report dismiss in badaun rape case

बदायूं के चर्चित कटरा सआदतगंज कांड में सुनवाई कर रहे स्पेशल जज पाक्सो एक्ट वीरेंद्र पांडेय ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए जांच एजेंसी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट को तथ्यहीन करार देते हुए मुख्य आरोपी पप्पू यादव को तलब किया है जिसे सीबीआई क्लीन चिट दे चुकी है। कोर्ट ने कहा है कि क्लोजर रिपोर्ट में पप्पू यादव को बड़ी लड़की के साथ नग्न अवस्था में देखे जाने का जिक्र है। इसके बावजूद पप्पू यादव को आरोपी नहीं बनाया गया। सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट के समर्थन में कई फॉरेंसिक साक्ष्य भी कोर्ट में दाखिल नहीं कर सकी।
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कटरा सआदतगंज में 27/28 मई की रात चचेरी-तहेरी बहनों की लाशें बाग में आम के पेड़ पर लटकी मिली थीं। लड़कियों के परिवार वालों ने पप्पू यादव, अवधेश यादव, उर्वेश यादव (सगे भाई) और कटरा सआदतगंज पुलिस चौकी के सिपाही सर्वेश यादव और छत्रपाल गंगवार के खिलाफ गैंगरेप के बाद हत्या का मामला दर्ज कराया था। घटना की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

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सीबीआई का दावा, लड़कियों ने खुदकुशी की

cbi closure report dismiss in badaun rape case

सीबीआई ने 11 दिसंबर 2014 को मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए दावा किया था कि लड़कियों ने खुदकुशी की। उनके साथ गैंगरेप भी नहीं हुआ था। ज्ञातव्य है इस बारे में मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट लगातार विवादों में रही। सीबीआई ने दोबारा शव निकाल कर जांच करने की बात की थी लेकिन इस प्रक्रिया में इतना विलंब कर दिया गया कि जब जांच टीम पहुंची तो बाढ़ आने से नदी के किनारे दफ्न किए गए शव बह चुके थे।

क्लोजर रिपोर्ट के आधार पर स्पेशल जज पाक्सो एक्ट ने वादी पक्ष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। वादी पक्ष ने 19 फरवरी 2015 को  प्रोटेस्ट दाखिल किया। लंबी सुनवाई के बाद स्पेशल जज पाक्सो एक्ट ने सीबीआई और आरोपियों को झटका देते हुए क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया है।

कोर्ट ने फिलहाल मामले में अगली सुनवाई के लिए कोई तारीख मुकर्रर नहीं की है। वादी पक्ष ने इसे न्याय की जीत बताया है वहीं आरोपी पक्ष के वकील जवाहर सिंह यादव ने कहा है कि वह न्यायिक लड़ाई लड़ते रहेंगे।

और ऐसे उलझता गया मामला

cbi closure report dismiss in badaun rape case

कटरा सआदतगंज के सनसनीखेज मामले में विवादास्पद तथ्य सामने आने के बाद पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने अपनी रिपोर्ट को ही सही ठहराया, जिसमें उन्होंने दोनों किशोरियों के प्राइवेट पार्ट्स में जख्म होने की बात कही थी। जबकि सीबीआई ने बलात्कार की बात से इंकार किया था। इसके बाद 19 जुलाई को सीबीआई ने दफन किए गए लड़कियों के शवों का फिर से पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया। इसके लिए एक मेडिकल बोर्ड भी बनाया गया।

23 जुलाई पुलिस सीबीआई ने अटैना घाट पर दफन शवों को निकालने के लिए मशक्कत शुरू की। तीन दिन तक मशक्कत जारी रही, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। पोस्टमार्टम की जरूरत बताकर तीन दिन तक शव निकालने के लिए मशक्कत करने के बाद 28 जुलाई को सीबीआई ने शवों के फिर से पोस्टमार्टम की जरूरत से खुद ही इंकार किया। साथ ही 20 अगस्त को सीबीआई के मेडिकल बोर्ड ने कह दिया कि किशोरियों के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ।

इसके बाद सीबीआई की जांच लगातार चलती रही और छह अक्तूबर को एक नया मोड़ यह आया कि सीबीआई ने पूछताछ के आधार पर दोनों किशोरियों के खुदकुशी करने की बात कह दी। कुछ दिन बाद सीबीआई के मेडिकल बोर्ड ने भी फाइनल रिपोर्ट दे दी, इसमें कहा गया था कि लड़कियों ने खुदकुशी की है। इसी आधार पर 12 दिसंबर को सीबीआई ने स्पेशल जज पाक्सो एक्ट की कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी।

कोर्ट के फैसले से सीबीआई को करारा झटका

cbi closure report dismiss in badaun rape case

इसी क्लोजर रिपोर्ट पर कोर्ट ने 6 जनवरी 2015 वादी पक्ष को नोटिस जारी कर पक्ष रखने को कहा और सीबीआई से सुबूत मांगे। पांच फरवरी को सीबीआई ने वादी पक्ष को क्लोजर रिपोर्ट से संबंधी सबूत दिए। वहीं 19 फरवरी को वादी पक्ष ने क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ कोर्ट में प्रोटेस्ट दाखिल किया। इस पर 30 मार्च से दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हुई।

वहीं 21 जुलाई को वादी पक्ष ने सभी साक्ष्य मुहैया कराने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली, जो 27 जुलाई को सीबीआई ने वादी पक्ष को सभी साक्ष्य मुहैया करा दिए। सात सितंबर को स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट ने बहस के बाद फैसला सुरक्षित रखा।

यह फैसला आता कि उससे पहले ही 18 सितंबर को सीबीआई ने फिर से बहस के लिए कोर्ट में अर्जी दी, छह 6 अक्तूबर को दोनों पक्षों के बीच कोर्ट में बहस हुई। बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला 16 अक्तूबर तक सुरक्षित रख लिया, इस दिन कोर्ट ने फैसला सुनाने के लिए फिर से 28 अक्तूबर मुकर्रर कर दी। इस तारीख को जब फैसला आया तो सीबीआई को करारा झटका लगा।

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