CBI चीफ को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका
एनजीओ सीपीआईएल ने सिन्हा के आवास के आगंतुक रजिस्टर मुहैया कराने वाले व्यक्ति के नाम का खुलासा करने वाले आदेश को वापस लिए जाने की मांग की है।
इस रजिस्टर में सिन्हा के घर पर 2जी और कोयला घोटाले के अभियुक्तों व उनके करीबियों के साथ उनकी मुलाकात को दर्शाया गया है।
जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने 2जी मामले की सुनवाई के लिए नियुक्त विशेष सरकारी अभियोजक (एसपीपी) आनंद ग्रोवर से राय मांगी।
एनजीओ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे और प्रशांत भूषण ने व्हिसल ब्लोअर के नाम का खुलासा करने में अपील अक्षमता को लेकर अदालत से बिना शर्त माफी मांगी।
दवे ने कहा कि यह सीबीआई निदेशक के चरित्र हनन का प्रयास नहीं है। अदालत को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को देखना चाहिए, जिनकी जांच किए जाने की जरूरत है।
आरोपों की सुनवाई पर SC सहमत
तब पीठ ने एनजीओ के उस आवेदन पर भी सुनवाई करने की सहमति जतायी, जिसमें अदालत से अपील की गई है कि वह व्हिसल ब्लोअर को लेकर पिछले आदेश को वापस ले।
वहीं अदालत ने सीबीआई निदेशक के अधिवक्ता विकास सिंह के इस आग्रह को अस्वीकार कर दिया कि दस्तावेजों को लीक करने वाले भेदिये के नाम का खुलासा करने से एनजीओ के इनकार करने पर सुप्रीम कोर्ट को मामले में आगे सुनवाई नहीं करनी चाहिए।
अधिवक्ता सिंह ने कहा कि कोई निर्देश जारी किए जाने से पहले उनकी दलील को सुना जाना चाहिए और कोई आदेश नहीं जारी किया जाना चाहिए। तब पीठ ने कहा नहीं मिस्टर विकास, हमें खेद है।
सिंह की दलील सुनने के बाद सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिया कि सीबीआई फाइलों और सिन्हा के खिलाफ आरोपों से जुड़े आगंतुक रजिस्टर समेत सभी दस्तावेज एसपीपी आनंद ग्रोवर को सौंपें। जो सारी सूचनाओं का अध्ययन करेंगे और 10 अक्तूबर को अगली सुनवाई पर अदालत की सहायता करेंगे।