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स्वायत्तता पर सीबीआई और केंद्र आमने-सामने

Fri, 02 Aug 2013 10:14 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 02 Aug 2013 10:14 PM IST
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cbi all powerful cbi chief without checks risky centre to supreme court

‘तोते को पिंजड़े से आजाद’ करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को केंद्र सरकार और देश की शीर्ष जांच एजेंसी सीबीआई आमने-सामने दिखीं।

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केंद्र सरकार ने जस्टिस आरएम लोढा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष हलफनामा पेश करके सीबीआई निदेशक का कार्यकाल दो वर्ष के बजाय कम से कम तीन साल करने के प्रस्ताव का विरोध किया।
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सीबीआई की स्वायत्तता के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने कहा कि बिना जवाबदेही के जांच एजेंसी निदेशक निरंकुश हो सकते हैं। सीबीआई अफसरों के खिलाफ मोटी उगाही और जांच में हेराफेरी की गंभीर शिकायतें मिलती रहती हैं।
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ऐसे में सीबीआई के लिए जवाबदेही आवश्यक है। ऐसी मनमानियों पर अंकुश लगाने के लिए ही आयोग के गठन का प्रस्ताव किया गया है।

कोयला घोटाला मामले में सीबीआई के हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दाखिल जवाब में सरकार ने एजेंसी निदेशक का न्यूनतम कार्यकाल तीन साल करने के ब्यूरो के सुझाव को दरकिनार कर दिया है।

केंद्र ने कहा है कि बगैर नियंत्रण और असंतुलन के अधिकार प्राप्त निदेशक के निरंकुश होने का खतरा रहेगा।
जवाबदेही आयोग को लेकर सीबीआई के विरोध को अस्वीकार करते हुए सरकार ने कहा है कि एक बाहरी स्वतंत्रता निगरानी तंत्र की आवश्यकता है।

रिटायर्ड जजों की अगुवाई में प्रस्तावित जवाबदेही आयोग के गठन से सीबीआई की प्रतिष्ठा और उसकी निष्पक्षता पर उंगली उठाना मुश्किल हो जाएगा।

सरकार देश के नागरिकों के अधिकारों के प्रति सजग है। स्वायत्तता के साथ जवाबदेही जरूरी है। सीबीआई को गिरफ्तारी तथा छापा मारने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार असीमित नहीं हैं। उन पर निगरानी आवश्यक है। किसी भी मनमानी को रोकने के लिए जवाबदेही आयोग के गठन का प्रस्ताव पेश किया गया है।

एजेंसी के मुख्य सतर्कता अधिकारी के आंतरिक गड़बड़ी रोकने में सक्षम होने के सीबीआई के दावे पर सरकार ने कहा है कि सतर्कता अधिकारी सीबीआई के निदेशक के मातहत काम करता है।

वह सीबीआई निदेशक के कामकाज और उसकी खामियों पर उंगली नहीं उठा सकता। इस समय जांच में गड़बड़ी की शिकायत के लिए कोई फोरम नहीं है। जवाबदेही आयोग इस कमी को पूरा करेगा।

सरकार ने वरिष्ठ नौकरशाहों पर मुकदमा चलाने की अनुमति के लिए केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने के सीबीआई के तर्क को भी ठुकरा दिया है।


सरकार का यह दृष्टिकोण इस जांच एजेंसी की स्वायत्तता सुनिश्चित करने के बारे में सुप्रीम कोर्ट को दिए गए आश्वासन पर भी सवाल उठाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को ‘कैद में तोते’ के रूप में परिभाषित करते हुए कहा कि उसे राजनीतिक सत्ता के हस्तक्षेप और बाहरी प्रभावों से मुक्त कराना होगा।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल 22 पन्नों के हलफनामे में कहा है कि समुचित नियंत्रण और संतुलन के बगैर ही सीबीआई निदेशक का अधिकार प्राप्त होना संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा और हमेशा ही दुरुपयोग का खतरा बना रहेगा।

सीबीआई के अभियोजन निदेशक का कार्यकाल तीन साल करने की जांच एजेंसी की सिफारिश को भी सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है।

साथ ही एजेंसी निदेशक को सचिव स्तर की आर्थिक स्वायत्तता प्रदान करने की मांग पर कहा है कि मंत्रियों के समूह की ओर से सीआरपीएफ महानिदेशक के समान ही अधिकार देने की सिफारिश की गई है।

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