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बेहिचक सिफारिशें पेश करे कावेरी निगरानी समिति

Tue, 30 Oct 2012 10:36 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 30 Oct 2012 10:36 PM IST
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Cauvery Monitoring Committee Feel free to in giving recommendations

सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी निगरानी समिति (सीएमसी) से तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर होने वाली बैठक में बिना किसी हिचक के अपनी सिफारिशें पेश करने को कहा है। शीर्ष कोर्ट ने कहा है कि सीएमसी इस पर ध्यान न दे कि मामला शीर्षस्थ अदालत में विचाराधीन है लिहाजा उसका अधिकार क्षेत्र सीमित है। बुधवार को होने वाली बैठक में विचाराधीन मामला सीएमसी की ओर से राय दिए जाने के आड़े नहीं आएगा।

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जस्टिस डीके जैन और जस्टिस जगदीश सिंह खेहर की पीठ ने कहा कि कावेरी निगरानी समिति दोनों राज्यों की ओर से उठाए जाने वाले सभी मुद्दों की जांच कर अपनी सिफारिश पेश करे। दोनों राज्यों को समिति की सिफारिशों का पूरी तरह पालन करना होगा। पीठ ने यह आदेश उस समय दिया जब कर्नाटक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता फली एस नारीमन ने कहा कि कावेरी निगरानी समिति की सिफारिशों पर राज्य अमल करेगा।
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तमिलनाडु की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने जल संसाधन सचिव की ओर से राज्यों के मुख्य सचिवों को 26 अक्तूबर को लिखे पत्र की प्रति अदालत में पेश की। इस पत्र में पिछली बैठक का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के कारण कावेरी निगरानी समिति की 31 अक्तूबर की बैठक में जल की कमी के सवाल पर विचार करने के बारे में आशंका व्यक्त की गई थी। लेकिन सुनवाई के दौरान दोनों राज्य इस बात पर सहमत थे कि समिति को तमिलनाडु में जल की कमी सहित सभी मुद्दों पर विचार करना चाहिए।
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पीठ ने कहा कि राज्य सरकारें बाद में किसी भी मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांग सकती हैं। अदालत के दरवाजे हमेशा उनके लिए खुले हुए हैं। इसके साथ ही अदालत ने इस मामले की सुनवाई 26 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को नौ हजार क्यूसेक पानी छोड़ने के 29 सितंबर के न्यायिक आदेश पर रोक लगाने के कर्नाटक के किसानों की याचिका 12 अक्तूबर को खारिज कर दी थी।


गौरतलब है कि कावेरी नदी प्राधिकरण ने कर्नाटक और तमिलनाडु का दौरा करने वाले केंद्रीय दल के निष्कर्ष के आधार पर 11 अक्तूबर को 8.85 टीएमसी पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। इससे पहले दोनों राज्यों ने प्रधानमंत्री की ओर से नौ हजार क्यूसेक पानी प्रतिदिन छोड़ने के आग्रह को ठुकरा दिया था।

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