फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Yaqoob Qureshi took back his statement on Charlie Hebot Attack

'51 करोड़ के इनाम' पर फंसे बसपा नेता याकूब, मुकदमा दर्ज

Fri, 09 Jan 2015 02:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Fri, 09 Jan 2015 02:16 PM IST
विज्ञापन
Yaqoob Qureshi took back his statement on Charlie Hebot Attack

आतंकियों को 51 करोड़ का इनाम देने की घोषणा करने वाले पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी बृहस्पतिवार को अपने बयान से पीछे हट गए। बुधवार को अपने बयान को सियासत से हटकर बताने वाले याकूब खामोश ही रहे।  बृहस्पतिवार को उन्होंने न कोई नया बयान जारी किया और न ही किसी के सामने आए। उनका मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ रहा। चर्चा है कि पार्टी सुप्रीमो मायावती की फटकार के बाद याकूब ने यह चुप्पी साधी है। उधर, थाना कोतवाली में दरोगा लाल सिंह ने याकूब कुरैशी के खिलाफ भड़काऊ बयान देने का मुकदमा दर्ज कराया है।

विज्ञापन


बुधवार को फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक साप्ताहिक अखबार के दफ्तर पर हमला कर आतंकियों ने 10 पत्रकारों समेत 12 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। हमलावर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का कार्टून प्रकाशित करने से खफा थे। डेनिस कार्टूनिस्ट पर 51 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर चर्चा में आए याकूब ने इस पर कहा था कि पेरिस में यह हमला करने वाले यदि दावा करेंगे तो वह उन्हें 51 करोड़ रुपये का इनाम देंगे। कहा था कि पेरिस में जो हुआ वह, गलत नहीं है। इस बयान से एक बार फिर हलचल मच गई।
विज्ञापन


इधर, बृहस्पतिवार को मामला उल्टा नजर आया। याकूब और बसपाइयों ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली। याकूब के घर मीडियाकर्मियों का जमावड़ा लगा रहा, लेकिन उन्होंने किसी से बात नहीं की। यहां तक कि उन्होंने पहले मीडियाकर्मियों को बुलाया और फिर बिना किसी से मिले गायब हो गए। यही नहीं, उन्होंने अपने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिए। चर्चा है कि पार्टी सुप्रीमो ने इस तरह की बयानबाजी पर उन्हें कड़ी फटकार लगाई है। यही कारण है कि याकूब पीछे हटते नजर आ रहे हैं। उधर, किसी बसपा पदाधिकारी ने भी इस प्रकरण पर कोई बयान नहीं दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

महज सियासी लाभ के लिए दिया बयान

Yaqoob Qureshi took back his statement on Charlie Hebot Attack

पिछले कुछ दिनों से याकूब कुरैशी ज्यादा चर्चा में नहीं थे। मुरादाबाद के लोकसभा चुनाव में भी बसपा के टिकट पर उन्हें करारी शिकस्त मिली थी। विवादित बयान देने के पीछे सियासी लाभ लेने की भी मंशा रही है। डेनमार्क के कार्टूनिस्ट पर जब याकूब ने 51 करोड़ का इनाम घोषित किया था तो वे अचानक चर्चा में आ गए थे। इसका उन्हें लाभ भी हुआ था। वे अचानक देशभर के मीडिया में छा गए थे। धर्म से जोड़कर उन्होंने अपने बयान को खूब कैश कराया था।

ऐसा ही लाभ लेने के फेर में वे आतंकियों के समर्थन का बयान दे बैठे। जानकारों का मानना है कि पिछली बार मिली लोकप्रियता के कारण ही याकूब ने इस बार हत्यारों को 51 करोड़ का इनाम देने की घोषणा कर दी। धार्मिक कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने भावनाओं को कैश कराने की भी कोशिश की। उन्होंने खुद को बचाने के लिए इसे गैर राजनैतिक बयान भी बताया, लेकिन उनकी पार्टी इस पर असहज हो गई। जैसे ही मामला चर्चा में आया याकूब गायब हो गए। उनके समर्थक भी छिपते नजर आ।

बयान देकर पीछे हट जाना और फिर गायब हो जाने का असर क्या होगा, यह भी देखने वाली बात होगी। वहीं कुछ संगठनों ने भी याकूब को आड़े हाथों लिया है। सच संस्था के अध्यक्ष संदीप पहल ने कहा कि याकूब ने जिस तरह से आतंकियों का समर्थन किया है, उसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

कार्टूनिस्ट की मौत का दावा गलत

Yaqoob Qureshi took back his statement on Charlie Hebot Attack

बुधवार को अपने बयान में याकूब ने कहा था उन्होंने जिस कार्टूनिस्ट के सिर पर 51 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था, उसकी मौत हो चुकी है। जबकि बुधवार को भी इंटरनेट पर कार्टूनिस्ट ने अपने को सुरक्षित बताते हुए किसी तरह के डर से इनकार किया। ऐसे में कार्टूनिस्ट की मौत के याकूब के दावे में भी सच्चाई नहीं दिखती।

पुलिस ने शाम को की कार्रवाई:
बुधवार के बयान के बाद शासन और प्रशासन में खलबली मच गई थी। पुलिस अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लिया और याकूब कुरैशी के खिलाफ कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। दरोगा लाल सिंह की तहरीर पर याकूब पर 505 आईपीसी की धारा लगी है। इस धारा में किसी भी समुदाय या वर्ग के लोगों के बीच भड़काऊ बयान देने का अपराध शामिल है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed