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जन्मदिन पर घर लौटा 'मृत' मासूम

Sat, 26 Jul 2014 05:20 PM IST
Updated Sat, 26 Jul 2014 05:20 PM IST
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case of mistaken identity:

वैसे तो यह पुनर्जन्म का मामला नहीं है। मगर किसी मां-बाप के लिए उससे कम भी नहीं है। क्योंकि जिस बच्चे को लोग हादसे में मरा हुआ मान लें और वह अपने जन्मदिन पर घर लौट आए तो यह किसी चमत्कार से कम नहीं लगता।

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हुआ यूं कि तेलंगाना के मेडक जिले में बृहस्पतिवार को एक मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन से एक बस की टक्कर हो गई थी। हादसे में बस में सवार 14 स्कूली बच्चों समेत 16 लोगों की मौत हो गई थी।
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अस्पताल प्रशासन ने गलती से किसी और बच्चे दत्तू की जगह छह साल के दर्शन गौड़ को मृत मान लिया। यही नहीं, अस्पताल ने दर्शन के पिता स्वामी गौड़ को दर्शन का शव बताकर दत्तू की लाश सौंप दी थी।
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दुख में डूबे दर्शन के मां-बाप ने अपना बेटा मानकर दत्तू का अंतिम संस्कार तक कर डाला। मगर, हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती दर्शन को शुक्रवार को जैसे ही होश आया, उसने अपने पिता को पुकारा, तब जाकर असलियत सामने आई। शुक्रवार को ही दर्शन का जन्मदिन भी था।

ड्राइवर अगर शॉर्टकट ना लेता, तो बच जाते मासूम

case of mistaken identity:

इस दर्दनाक हादसे के लिए बस ड्राइवर की लापरवाही को जिम्मेदार माना गया। ड्राइवर ने अगर शॉर्टकट अपनाने की कोशिश नहीं की होती तो इन मासूमों की जिंदगी बचाई जा सकती थी।

मेडक के प्रभारी जिलाधिकारी ए शरत के मुताबिक बस नियमित ड्राइवर की जगह एक दूसरा ड्राइवर चला रहा था। उसने गांव में दो मानवयुक्त रेलवे क्रॉसिंग होने के बावजूद शॉर्टकट अपनाया और एक मानवरहित क्रॉसिंग से रेल लाइन पार करने की कोशिश की।

इस दौरान उसने नांदेड़-सिकंदराबाद पैसेंजर ट्रेन पर ध्यान नहीं दिया और ट्रेन ने बस में जबर्दस्त टक्कर मार दी। बस को करीब 50 मीटर तक घसीटने के बाद ट्रेन रुकी।

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