LTC घोटाला: फंस गए 6 'सांसद'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीबीआई ने एलटीसी घोटाला मामले में राज्यसभा के तीन वर्तमान और तीन पूर्व सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इन पर दलालों के साथ मिलकर अपने एलटीसी की टिकट में फर्जीवाड़ा कर पैसे बनाने का आरोप है।
सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर इस सांसदों और दलालों के दिल्ली और ओडिशा स्थित दस ठिकानों पर छापेमारी भी की है। सीबीआई के मुताबिक एफआईआर में राज्यसभा के तीन मौजूदा सांसदों का नाम है।
ये सांसद हैं बसपा के ब्रजेश पाठक, तृणमूल के डी बंधोपाध्याय और मीजो नेशनल फ्रंट के लालमिंग लियाना। घोटाले में राज्यसभा के तीन पूर्व सांसदों का भी नाम है।
सांसद बोले हम बेकसूर हैं
इनमें भाजपा के जेपीएन सिंह, बीजू जनता दल की रेनु प्रधान और राष्ट्रीय लोकदल के महमूद ए. मदनी शामिल हैं।
लीव ट्रैवल कन्शेसन (एलटीसी) घोटाले की पहली एफआईआर में सीबीआई ने जदयू के राज्यसभा सांसद अनिल कुमार सहनी को भी आरोपी बना रखा है।
इन पर हवाई जहाज के फर्जी टिकट और बोर्डिंग पास देकर सरकार को 9.5 लाख का चूना लगाने का आरोप है। सीबीआई के मुताबिक शुक्रवार को दर्ज एफआईआर में शामिल छह सांसदों पर भी इसी तरह का आरोप है।
सीबीआई ने की कार्रवाई शुरू
यह मामला तब उजागर हुआ जब एयर इंडिया के सतर्कता विभाग ने अपने कुछ अधिकारियों के एलटीसी फर्जीवाड़े का खुलासा किया।
सीबीआई ने जब उस मामले की जांच शुरू की तो धांधली के परत खुलते गए और मामला राज्यसभा सांसदों तक पहुंच गया। सीबीआई ने राज्यसभा से औपचारिक अनुमति लेकर इस सांसदों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
सीबीआई का दुरुपयोग कर रहा केंद्र
तृणमूल कांग्रेस ने एलटीसी मामले में केंद्र सरकार पर सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। पार्टी प्रवक्ता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा है कि राजग सरकार सियासी वैमनस्य के तहत विपक्षी पार्टी को निशाना बना रही है।
हम इसकी घोर निंदा करते हैं, क्योंकि लोकतंत्र में किसी भी हाल में ऐसा नहीं होना चाहिए। ब्रायन ने कहा कि सालों तक कांग्रेस की नेतृत्व वाली सरकार राजनीतिक हित के लिए सीबीआई का दुरुपयोग करती रही थी और अब भाजपा की सरकार उन्हीं के नक्शेकदम पर चल रही है।
कैसे खुला मामला
यह मामला इस साल मार्च में तब सामने आया था जब सतर्कता विभाग ने कोलकाता एयरपोर्ट पर एक व्यक्ति को 600 खाली बोर्डिंग पास के साथ गिरफ्तार किया।
केंद्रीय सतर्कता आयोग की ओर से जानकारी मिलने पर सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की। जांच एजेंसी ने पाया कि घोटाले के ट्रैवल एजेंटों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया है।