इन चार कार्टूनिस्टों से क्यों थी आतंकियों को चिढ़?
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शार्ब, वोलिंस्की, काबू और टिग्नूज की गिनती पेरिस की श्रेष्ठ कार्टूनिस्टों में होती थी। अपने कार्टूनों के जरिए उन्होंने दुनिया भर के अतिवाद के खिलाफ हमले किए। फ्रेंच पत्रिका शार्ली एब्डो के राजनीतिक कार्टूनों से खफा आतंकियों ने बुधवार को उन्हें मार डाला।
शार्ली एब्डो के दफ्तर पर हुए आतंकी हमले में 10 पत्रकारों और दो पुलिसकर्मियों समेत 12 की मौत हो गई। शार्ब, वोलिंस्की, काबू और टिग्नूज जैसे लेखकीय नामों से मशहूर स्टीफन कार्बोनियर, जॉर्ज वोलिंस्की और ज्यां काबू और बर्नार्ड वर्लाक भी मृतकों में शामिल हैं। कार्बोनियर पत्रिका के संपादक भी थे।
व्यंग्य और कार्टून के लिए मशहूर पत्रिका शार्ली एब्डो पर जब नकाबपोश आतंकियों ने हमला किया, कार्बोनियर और अन्य कार्टूनिस्ट संपादकीय मीटिंग में व्यस्त थे। क्लाशनिकोव रायफल से लैस हमलावरों ने नए कार्टूनों की कल्पना से पहले ही उस बैठक का खूनी अंत कर दिया।
पढ़िए, हमले में मारे गए उन मशहूरों कार्टूनिस्टों के बारे में विस्तार से-
स्टिफेन कार्बोनियर
47 वर्षीय स्टिफेन कार्बोनियर, जिन्हें शार्ब नाम से भी जाना जाता था, शार्ली एब्डो के संपादक थे। वह पत्रिका के वरिष्ठ कार्टूनिस्टों में से एक थे और अपने कार्टूनों के जरिए अतिवाद के प्रखर विरोधी के रूप में जाने जाते थे।
2011 में शार्ली एब्डो के दफ्तर पर बम फेंका गया था, उस समय कार्बोनियर ही संपादक थे। पत्रिका ने पैगंबर मोहम्मद साहब को अतिथि संपादक बना दिया था, उसी के विरोध में बम से हमला किया गया।
उस समय हमलावरों को चुनौती देते हुए कार्बोनियर ने पत्रिका के उस अंक की कॉपी, जिसका अतिथि संपादक पैंगबर मोहम्मद साहब को बनाया गया था, तस्वीरे खिंचवाई थी। 2012 में शार्ली एब्डो ने पैगंबर मोहम्मद साहब का कार्टून छापा था, उस समय कार्बोनियर को पुलिस सुरक्षा में रखना पड़ा था।
एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि मेरे बच्चे नहीं है, पत्नी नहीं है, न कार है और न बैंक बैलेंस। मैं घुटने टेकने के बजाय मरना पसंद करूंगा। शार्ब को 2009 में पत्रिका संपादक बनाया गया था। वह 1992 में बतौर स्टाफ शार्ली एब्दो में शामिल हुए थे।
ज्यां काबू
76 वर्ष के ज्यां काबू पिछले 60 वर्षों से कार्टून बना रहे थे। उन्हें फ्रांस के शानदार कार्टूनिस्टों में से एक माना जाता था। 50 के दशक में उन्होंने फ्रांस की सेना में भी काम किया था। बाद के दिनों में उन्होंने कई पत्रिकाओं के लिए कार्टून बनाया।
उन पत्रिकाओं में सबसे मशहूर 'हारा-किरी' थी। 60 की दशक की ये पत्रिका शार्ली एब्डो जैसी पत्रिकाओं की पथ प्रदर्शक मानी जाती है। काबू के बेटा मानो सोलो सिंगर और कंपोजर थे। 2010 में महज 46 वर्ष की उम्र में उनकी मौत हो गई थी।
काबू का पहला कार्टून 1954 में पेरिस के एक समाचार पत्र में छपा था। 2006 में उन्होंने मोहम्मद साहब के कई विवादित कार्टून बनाए थे।
जॉर्ज वोलिंस्की
80 वर्षीय जार्ज वोलिंस्की शार्ली एब्डो के कार्टूनिस्टों में एक और बड़ा नाम थे। उनके कार्टून हारा-किरी, पेरिस मार्च जैसी पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित हो चुके हैं।
वोलिंस्की यहूदी थे। उनका जन्म ट्यूनिशिया में हुआ था। हालांकि बचपन में वह फ्रांस आ गए थे। 26 साल की उम्र में उन्होंने हारा-किरी पत्रिका के लिए काम करना शुरु कर दिया था। 2005 में उन्हें फ्रांस का सर्वश्रेष्ठ नागरिक पुरस्कार 'लीजन ऑफ ऑनर' दिया गया था।
वोलिंस्की का अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रबल समर्थक माना जाता था। वोलिंस्की की मौत के बाद उनके इंस्टाग्राम पर उनकी बेटी ने एक फोटो शेयर की, जिसमें वे टेबल पर कार्टून बना रहे थे। तस्वीर के साथ लिखा गया-पापा चले गए, वोलिंस्की अब भी जीवित है।
बर्नार्ड वर्लाक
1957 में जन्में बर्नाड वर्लाक अपने लेखकीय नाम टिग्नू के नाम से अधिक जाने जाते थे। 1980 में उनका पहला कार्टून छपा था। वह कार्टूनिस्ट फॉर पीस के सदस्य भी थे। अदालतों को कवर करने वाले संगठन प्रेस ज्यूडिसियरे से भी वे जुड़े थे।
उन्होंने अंतिम कार्टून अपना ही बनाया था, जिसमें उन्होंने नए वर्ष की शुभकामनाएं दी थी।