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धनबाद में मिली सुभाष चंद्र बोस की कार!

Wed, 30 Jul 2014 05:03 PM IST
Updated Wed, 30 Jul 2014 05:03 PM IST
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car supposedly used by netaji in dhanbad becomes a cynosure

धनबाद में इन दिनों एक कार लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। दावा किया जा रहा है कि इसका इस्तेमाल 1930-40 के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने किया था। यह कार यहां के बंद प्लांट के वेयरहाउस से मिली है।

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पुटकी बलिहारी माइंस के जनरल मैनेजर केसी मिश्रा के अनुसार, इस महीने के दूसरे हफ्ते में पुटकी बलिहारी इलाके में स्थित भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के बंद हो चुके बराड़ी कोक प्लांट में मिली।
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बीसीसीएल ने कार के ऐतिहासिक महत्व को समझते हुए इसे 22 जुलाई को कोयला नगर स्थित गेस्ट हाउस भिजवा दिया। मिश्रा ने बताया कि इलाके के बुजुर्ग लोगों ने बताया कि 1930-40 के दौरान इस कार का इस्तेमाल अपने दौरों के लिए नेताजी किया करते थे। वह उस समय टाटा लेबर एसोसिएशन के अध्यक्ष थे।

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धनबाद में इस कार को चलाते थे नेताजी

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मिश्रा ने बताया कि इस जानकारी के बाद उन्होंने इस कार को संरक्षित रखने के लिए बीसीसीएल प्रबंधन से अनुमति मांगी। कार फोर्ड सुपर डीलक्स मॉडल की है और यह नेताजी के अंकल अशोक बोस की है जोकि ईस्ट इंडिया कंपनी के बराड़ी कोक प्लांट में केमिकल इंजीनियर थे। नेताजी धनबाद में रहने के दौरान इस कार का इस्तेमाल करते थे।

कार के इंजन पर एसडी 108459एफ मॉडल 6ए लिखा हुआ है। साथ ही इसका चेसिस नंबर 2617 एसजीएएनटी एम 13220 है। कार का रजिस्ट्रेशन नंबर बीआरआर 3201 है।

जिला परिवहन अधिकारी आरआर शर्मा ने बताया कि परिवहन विभाग में वाहनों का रजिस्ट्रेशन 1972-73 में शुरू हुआ था। इससे पहले यह काम पुलिस अधीक्षक कार्यालय में होता था।

कंपनी ने किया पुष्टि से इंकार

car supposedly used by netaji in dhanbad becomes a cynosure

उन्होंने बताया कि रजिस्ट्रेशन नंबर की पहली सीरीज बीआरआर से शुरू हुई थी और हो सकता है कि इस कार का 1972-73 में दोबारा रजिस्ट्रेशन कराया गया हो।

धनबाद 24 अक्तूबर 1956 को जिला बना था। इससे पहले यह बिहार के मनभूम जिले का हिस्सा था। उस वक्त जिले का हेडक्वार्टर पुरुलिया में था जोकि अब पश्चिम बंगाल में है।

वहीं दूसरी ओर बीसीसीएल के चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्टर टीके लाहिड़ी ने बताया कि उनकी कंपनी इस कार के ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि नहीं करती है। लोगों का दावा है कि नेताजी धनबाद में रुकने के दौरान इसका इस्तेमाल करते थे। इसी आधार पर इसे संरक्षित रखा गया है।

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