कैप्टन अब्बास अली का अलीगढ़ में निधन
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आजाद हिंद फौज के सिपाही और स्वतंत्रता सेनानी कैप्टन अब्बास अली का अलीगढ़ के अस्पताल में शनिवार को निधन हो गया। कैप्टन अब्बास अली 96 साल के थे।
वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में कैप्टन के पद पर थे। आजादी की लड़ाई लड़ते हुए उन्हें मुलतान के किले में कैद कर फांसी की सजा सुनाई गई थी।
बाद में आजादी को लेकर नेहरु और माउंटबेटन में समझौते के बाद उनकी मुलतान की जेल से रिहाई संभव हो सकी थी।
कैप्टन अब्बास अली बुलंदशहर से एमएलसी भी रहे। वे राममनोहर लोहिया के बेहद करीबी थे और उनके समाजवादी आंदोलन को आगे बढ़ाने में खास योगदान दिया। वे पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। आज अलीगढ़ के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे आखिर तक सामाजिक तौर पर सक्रिय रहे और समाज के भले के लिए अपना योगदान देते रहे।
कैप्टन अब्बास अली की संघर्ष गाथा
- सुभाष बाबू की आजाद हिंद फौज में कैप्टन के पद पर रहे। 1944 में रंगून से अराफान कूच किया और अराफान की लड़ाई में हिस्सा लिया।
- अराफान में ही 6 महीने ब्रिटिश आर्मी को बंधक बनाए रखा लेकिन जापान के पास हवाई आक्रमण नहीं था। इसका फौज को नुकसान उठाना पड़ा।
- अंडमान की सेल्युलर जेल में तिरंगा झंडा फहराने वालों में से एक और स्वतंत्रता की घोषणा की।
- 1945 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बाद गिरफ्तार किए गए। मुकदमे में फांसी की सजा सुनाई गई। मुलतान के किले में बंद शहादत का इंतजार कर रहे थे कि नेहरू-माउंटबेटन समझौता हुआ और फांसी टल गई।