राजस्थान: फिर मुकाबले को तैयार उम्मीदवार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
13 सितम्बर को होने वाले चुनाव में भाजपा और कांग्रेस पार्टियों की टक्कर निर्दलियों से होगी। यहां कोई तीसरा दल ताल नहीं ठोक रहा है। निर्दलीय भी कांग्रेस और भाजपा के बागी है, जो पार्टियों को ही सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाएंगे।
राजस्थान में वैर, सूरजगढ़, कोटा दक्षिण और नसीराबाद सीटों पर बुधवार को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि थी। चारों सीटों पर इन दोनों दलों के बीच ही मुख्य मुकाबला होने की सम्भावना है।
विधानसभा सीट: वैर
भरतपुर जिले की वैर सीट पर कांग्रेस ने नए चेहरे भजनलाल जाटव को उतारा है, वहीं भाजपा ने सांसद रह चुके गंगाराम कोली को चुनाव मैदान में उतारा है। इस सीट पर इन दोनों ही जातियों का अच्छा वोट बैंक है। जाटव कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के नजदीकी माने जाते हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार का अंतर अधिक नहीं था। भाजपा को यहां खासी मेहनत करनी पड़ेगी।
उपचुनाव की तैयारियां जोरों पर
विधानसभा सीट: नसीराबाद
अजमेर जिले की नसीराबाद सीट पर कांग्रेस ने यहां से विधायक रहे महेन्द्र सिंह और पूर्व मंत्री गोविंद सिंह गुर्जर के भाई रामनारायण गुर्जर को प्रत्याशी बनाया है, जबकि भाजपा ने सरिता गैना को टिकट दिया है। सरीता अजमेर की जिला प्रमुख रह चुकी हैं। यह सीट गुर्जर और जाट बाहुल्य है और मुकाबला भी इन दोनों जातियों के प्रत्याशियों के बीच ही है। इस सीट पर भी विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत का अंतर ज्यादा नहीं था।
विधानसभा सीट: कोटा दक्षिण
कोटा दक्षिण सीट पर कांग्रेस ने शिवकांत नंदवाना को और भाजपा ने संदीप शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। युवक कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष रह चुके शिवकांत जहां पूर्व मंत्री शांति धारीवाल के नजदीकी हैं, वहीं संदीप शर्मा यहां से पूर्व विधायक और अब सांसद बन चुके ओम बिड़ला के नजदीकी हैं। दोनों ही ब्राह्मण समुदाय से आते हैं। यहां भाजपा की पिछले प्रदर्शन को देखते हुए भाजपा को फायदा मिलता दिख रहा है।
विधानसभा सीट: सूरजगढ़
झुंझुनूं में जाट बाहुल्य सूरजगढ़ सीट से कांग्रेस ने पूर्व विधायक श्रवण कुमार को टिकट दिया है, वहीं भाजपा ने पूर्व मंत्री डॉ. दिगम्बर सिंह को उतारा है। दोनों दलों के प्रत्याशियों को भितरघात का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि दिगम्बर सिंह यहां के लिए बाहरी है। वे मूलत: भरतपुर से हैं। उधर, श्रवण कुमार को भी झुंझुनूं में प्रभावशाली माने जाने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री शीशराम ओला के परिवार का विरोध झेलना पड़ सकता है।