चुनाव राजस्थान में, जीत की दुआएं पाकिस्तान में
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बार्डर पार से भी राजस्थान विधानसभा चुनाव पर नजरें टिकी हुई हैं। वे वहां से यहां के प्रत्याशियों के लिए जीत की दुआएं मांग रहे हैं।
पाकिस्तान सीमा से सटे बाड़मेर जिले की सीटों पर खड़े तीन प्रत्याशियों के खास रिश्तेदार पाकिस्तान में बसे हुए हैं और वे बड़ी उम्मीद से उस घड़ी का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें उनके रिश्तेदार की जीत की खबर आएगी।
खास बात यह है कि बाड़मेर की शिव सीट से लड़ रहे कांग्रेस और भाजपा, दोनों के ही प्रत्याशियों के सगे-सम्बंधी बॉर्डर पार रह रहे हैं, जो ससुराल पक्ष से हैं।
एक जवाई की हार तय
शिव सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी अनीन खान और पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र मानवेन्द्र सिंह के ससुराल पक्ष की रिश्तेदारियां सीमा पार हैं।
अब भले ही लाख दुआएं दोनों के लिए की जा रही हों, लेकिन एक की हार तो तय है।
अमीन का ससुराल पाकिस्तान में अमरकोट के निकल गोगासर गांव में है और यहां वे साल भर पहले ही होकर आए हैं।
इधर, मानवेन्द्र सिंह के बुआ ससुर राणा हमीर सिंह पाकिस्तान के बड़े नेता है। साली की शादी पाकिस्तान में हुई है। साथ ही, भाई रिश्तेदारों की शादियां भी वहीं हुई हैं।
मानवेन्द्र सिंह के अनुसार भले ही पाक में बसे हैं, लेकिन रिश्तेदार होने के कारण वे उनकी चुनावी स्थितियों पर बराबर नजर रखे हुए हैं और बेसब्री से खुशखबरी का इंतजार कर रहे हैं।
पाक विस्थापितों में पहले प्रत्याशी
इधर, बाड़मेर जिले की ही चोहटन सीट से भाजपा प्रत्याशी तरुणराय कागा पाकिस्तानी विस्थापितों में से एक हैं। वे 1971 में परिवार सहित पाकिस्तान के छाछरो क्षेत्र भाड़ासिद्धा गांव से भारत आए थे।
वे पहले पाकिस्तानी विस्थापित हैं, जो चुनाव लड़ रहे हैं। उनके कई खास रिश्तेदार पाकिस्तान में बसे हैं और उनकी जीत की आस लगा रहे हैं। चोहटन में हजारों पाक विस्थापित परिवार हैं, जिसे कागा अपना वोट बैंक मानते हैं।
अमीन तब आए थे चर्चा में
करीब दो साल पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से संबंधित विवादित बयान देने पर अमीन खान को मंत्री पद गंवाना पड़ा था।
उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने के उद्देश्य से कहा था कि प्रतिभा पाटील यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के यहां रसोई करती थी और इस सेवा के कारण ही वे बड़े पद पर पहुंची। इसके बाद उनसे इस्तीफा ले लिया गया था।