खुलासा: सिंथेटिक कत्थे के अलावा सुपाड़ी में हैं कैंसर के सहयोगी तत्व
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सादा पान-सुपाड़ी से कैंसर नहीं होता, ये सोचने वाले गलतफहमी में हैं। अब खईके पान...से अकल का बंद ताला नहीं बल्कि कैंसर का दरवाजा खुल रहा है।
आगरा कैंसर सोसाइटी और एसएन मेडिकल कालेज की रिपोर्ट बताती है कि तंबाकू के बाद मुंह के कैंसर का बड़ा कारण पान, सुपाड़ी हैं। एसएन मेडिकल कालेज के रेडियोथेरेपी विभाग में बीते साल 578 मुंह के कैंसर के मामले सामने आए। तंबाकू के बाद सर्वाधिक मरीज पान-सुपाड़ी के लती मिले। चौंकना इसलिए भी कि 12 फीसदी मरीजों की उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच है।
दरअसल, पान में सिंथेटिक कत्थे में एल्डिहाइड, पॉलीफिनोल्स, टैनिंग जैसे 8-10 घातक तत्व होते हैं। प्राकृतिक कत्था महंगा होने के कारण पान विक्रेता सिंथेटिक कत्था इस्तेमाल कर रहे हैं। सुपाड़ी के अलावा परफ्यूम एलीमेंट भी मिलाए जाते हैं।
इनमें कई नुकसानदेह रसायन होते हैं। आगरा कैंसर सोसाइटी के सचिव डा. संदीप अग्रवाल बताते हैं कि ऐसे मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं, जो पान-सुपाड़ी के नियमित शौकीन हैं। लगातार सेवन से घातक तत्व मुख की त्वचा में संक्रमण करते हैं।
एसएन मेडिकल कालेज के रेडियोथेरेपी विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक डा. सुरभि गुप्ता ने बताया कि मुंह के कैंसर के लिए तंबाकू ही नहीं पान-सुपाड़ी भी बड़ा कारण है। कई ऐसे मरीज हैं, जो प्रत्यक्ष रूप से तंबाकू नहीं खाते, लेकिन पान के आदी हैं।
समुदाय विशेष के ज्यादा मरीज
- मुंह के कैंसर में अलीगढ़, आगरा, मथुरा, फीरोजाबाद के मरीजों की संख्या बढ़ी है। औसतन देखा जाए तो हर महीने 50-60 नए मरीज आ रहे हैं। इसमें समुदाय विशेष के मरीज ज्यादा हैं। चिकित्सकीय जांच में पता चला कि दिन में आठ से 12 पान खा जाते हैं।
दूषित पानी से बढ़ रहा पित्ताशय का कैंसर
- तंबाकू ही नहीं दूषित पानी भी कैंसर का कारण है। इससे पित्ताशय के कैंसर का खतरा बढ़ा है। औसतन हर महीने 10-15 मामले आते हैं। एसएन मेडिकल कालेज के रेडियोथेरपी विभाग से पता चला कि बीते साल 58 नए मरीज रहे। महिलाओं में पथरी पाया जाना बड़ा कारण रहा। मांसाहार खासतौर से मछली खाने वालों में पित्ताशय के कैंसर का खतरा 35 फीसदी तक ज्यादा रहा है। वजह, दूषित पानी में मछली का रहना है।
एसएन में कैंसर मरीजों की स्थिति (2015)
मुंह: 578
फेफड़े: 119
बच्चेदानी का मुख: 115
स्तन: 114
पित्ताशय: 58