मौत का सबसे आरामदायक रास्ता है कैंसर: डॉ स्मिथ
विश्व प्रसिद्ध पत्रिका ‘ब्रिटिश मेडिकल जनरल’ के पूर्व संपादक डॉ रिचर्ड स्मिथ की नजर में कैंसर मौत का सबसे अच्छा रास्ता है। उन्होंने एक बेतुकी सलाह देते हुए कहा है कि इस जानलेवा बीमारी का इलाज ढूंढने पर अरबों डॉलर खर्च नहीं करने चाहिए और रोगियों को अपनी मौत मरने देना चाहिए।
इस विवादित सलाह के बाद मेडिकल जगत में कैंसर के इलाज को लेकर बहस छिड़ गई है। ब्रिटेन व अमेरिका के अलावा भारत के कैंसर रोग विशेषज्ञों ने भी इसे बेतुकी सलाह बताते हुए कहा कि शुरुआती दौर में कैंसर का इलाज संभव है।
डॉ. स्मिथ ने अपने ब्लॉग में कैंसर के रोगियों को भी डॉक्टरों से दूर रहने की सलाह दे डाली। उन्होंने कहा, ‘कैंसर का रोगी अपना इलाज करवाते हुए एक कष्टप्रद मौत मरता है, जबकि वह लाइलाज रहते हुए एक रूमानी मौत मर सकता है, जहां उसे प्रियजनों को अलविदा कहने का, अंतिम संदेश छोड़ने का और मनपसंद काम करने का मौका मिलता है। ऐसे मौके अन्य रोगों से होने वाली अचानक मौत में नहीं मिलते।’
ब्रिटिश पत्रिका के पूर्व संपादक ने दी बेतुकी सलाह
दुनिया के बड़े कैंसर शोधकर्ता पीटर जॉनसन ने डॉ. स्मिथ की सलाह से असहमति जताई और कहा, ‘अरबों डॉलर खर्च करने की बदौलत ही आज कैंसर रोगियों का इलाज संभव हो सका है।’
ब्रिटेन के कैंसर रिसर्च संस्थान ने भी डॉ स्मिथ की टिप्पणी को ‘विनाशवादी’ बताते हुए कहा कि उन्हें उन युवाओं के बारे में भी सोचना चाहिए, जिन्हें इस बीमारी की वजह से समय से पहले ही दुनिया को अलविदा कहना पड़ता है। कैंसर रोगियों के परिजनों ने भी डॉ स्मिथ के विचारों को असंवेदनशील बताया है।
वहीं मुंबई के वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. विष्णु अग्रवाल कहते हैं कि अरबों डॉलर खर्च करने के बाद आज कम से कम इतना तो हुआ है कि कैंसर को शुरुआत में ही पकड़ने पर इसका इलाज संभव है। भविष्य में एडवांस स्टेज पर भी कैंसर का इलाज ढूंढने के लिए खर्च लगातार करते रहना होगा, लेकिन कैंसर रोगियों को मरने के लिए कतई नहीं छोड़ा जा सकता है।
लाइलाज स्किन कैंसर के लिए ‘पैनरैफ’ दवा
शोधकर्ताओं ने मेलानोमा स्किन कैंसर का प्रभावी इलाज खोज निकाला है। ब्रिटेन के कैंसर शोध संस्थान के शोधकर्ताओं की ‘पैनरैफ इनहिबिटर’ दवा कारगर है। शोध से जुड़े कैरोलिन स्प्रिंगर बताते हैं कि दवा बिना साइड इफेक्ट के ट्यूमर को बढ़ने से रोकती है। यह शरीर में कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं को खत्म करने में कारगर है।
भारत में कैंसर के मरीज
भारत में कैंसर रोगियों की अनुमानित संख्या पर 18 फरवरी 2014 को तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद ने राज्यसभा में जानकारी दी थी। इसके मुताबिक देश में वर्ष 2011 में कैंसर रोगियों की अनुमानित संख्या 28,19,457 थी, जो 2012 में बढ़कर 28,20,179 और वर्ष 2013 में 29,34,314 हो गई।