फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Can take steps such as Haryana BJP in Maharashtra?

क्या बीजेपी, महाराष्ट्र में भी उठा सकती है हरियाणा जैसा कदम?

Thu, 28 Aug 2014 07:50 PM IST
सुरेंद्र मिश्र/अमर उजाला, मुंबई
सुरेंद्र मिश्र/अमर उजाला, मुंबई Updated Thu, 28 Aug 2014 07:50 PM IST
विज्ञापन
Can take steps such as Haryana BJP in Maharashtra?

जिस तरह से भाजपा ने हरियाणा में हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) को गठबंधन तोड़ने पर मजबूर किया, क्या कुछ वैसा ही वह महाराष्ट्र में कर सकती है।

विज्ञापन


अंदरखाने से आ रही खबरों से तो ऐसा नहीं लगता, पर शिवसेना को यह डर है कि भाजपा ने जो बर्ताव हजकां के साथ किया है, वही शिवसेना के साथ भी कर सकती है।

इस आशंका को भांपते हुए शिवसेना के कुछ नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को सलाह दी है कि वह भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर सतर्क रहें।

शिवसेना महाराष्ट्र में भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी है। अब तक भाजपा हमेशा शिवसेना के साथ छोटे भाई की भूमिका में रही है लेकिन केंद्र में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद भाजपा के तेवर बदल गए हैं।
विज्ञापन


सूत्रों के अनुसार भाजपा महाराष्ट्र में चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद और उससे पहले 288 विधानसभा सीटों में से आधी हिस्सेदारी चाहती है, जबकि शिवसेना पुराने फॉर्मूले पर ही आगे बढ़ना चाहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अमित शाह से मधुर नहीं हैं शिवसेना के रिश्ते

Can take steps such as Haryana BJP in Maharashtra?

हरियाणा में मुख्यमंत्री पद और सीट बंटवारे को लेकर ही हजकां और भाजपा में अनबन हुई और उसके बाद हजकां ने भाजपा से नाता तोड़ लिया है।

महाराष्ट्र में भी इसी मुद्दे पर भाजपा-शिवसेना के रिश्ते तनावपूर्ण हैं। दूसरी तरफ आरपीआई समेत अन्य घटक दलों ने भी ज्यादा सीट की मांग कर दबाव बढ़ा दिया है। इससे भी शिवसेना की परेशानी बढ़ गई है।

शिवसेना हालांकि भाजपा से अलग होने की हिमाकत नहीं कर सकती, लेकिन अगर भाजपा नए फार्मूले पर अडिग रहती है तो शिवसेना की परेशानी जरूर बढ़ जाएगी। यही वजह है कि शिवसेना के नेता भाजपा से सिर्फ सतर्क रहने की ही सलाह दे रहे हैं।

नए नेतृत्व से असहज शिवसेना
दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे का भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से, तो उद्धव ठाकरे का आडवाणी समेत पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह से अच्छा तालमेल रहा है। पर, भाजपा के नए अध्यक्ष अमित शाह से शिवसेना के संबंध उतने मधुर नहीं है, इसलिए शिवसेना असहज स्थिति में है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed