'भगवान' के आगे सुप्रीम कोर्ट भी नतमस्तक, इस्तेमाल पर रोक नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कारोबार में देवी-देवताओं की तस्वीर और नाम के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि देश में 33 करोड़ देवी-देवता हैं और किसी भी नागरिक को किसी देवी-देवता के नाम पर कारोबार करने से नहीं रोका जा सकता। अदालत ने कहा कि लोगों को अपनी आस्था या निष्ठा का प्रयोग करने का अधिकार है।
चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उत्पादों पर भगवान की फोटो चिपकाने पर प्रतिबंध की गुहार लगाई गई थी।
पीठ ने दोटूक कहा कि हम वाणिज्यिक उत्पादों पर भगवान की तस्वीर का इस्तेमाल करने पर रोक नहीं लगा सकते। अगर किसी व्यक्ति की किसी खास भगवान पर आस्था है और वह चाहता है कि उस भगवान का फोटो उसके उत्पाद पर हो, जिससे कि उसका व्यवसाय फले-फूले और वह अमीर बन जाए। ऐसे में किसी को ऐसा करने से कैसे रोका जा सकता है।
कोई भी व्यक्ति कर सकता है भगवान का इस्तेमाल
पीठ ने कहा कि एक व्यवसायी अपनी दुकान का नाम लक्ष्मी स्टोर रख सकता। वह अपनी बेटी का नाम लक्ष्मी रख सकता है। इसी तरह भगवान बालाजी में आस्था रखने वाला कोई व्यक्ति बालाजी के नाम पर कारोबार कर सकता है।
चीफ जस्टिस ने कहा कि देश में हर व्यक्ति को पूजा करने की आजादी है। लिहाजा कोई अदालत इस पर रोक लगाने का निर्देश कैसे दे सकती है। लोग अपने बच्चों का नाम देवी-देवताओं के नाम पर रखते हैं।
क्या हम उन्हें ऐसा करने से रोक सकते हैं। पीठ ने कहा कि अगर मेरी कार, घर, दुकान आदि में भगवान की फोटो लगी है, तो इसमें गलत क्या है। आखिर हम लोगों को भगवान की तस्वीर का इस्तेमाल करने पर रोक कैसे लगा सकते हैं।