RTI के तहत नहीं मिल सकती ITR की जानकारी
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सूचना केअधिकार (आरटीआई) के तहत किसी व्यक्ति के इनकम टैक्स रिटर्न की जानकारी किसी दूसरे को नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने इनकम टैक्स रिटर्न को पब्लिक प्रोपर्टी मानने से इनकार कर दिया है।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग के पूर्व सूचना आयुक्त शैलेश गांधी की उस याचिका को सुनवाई से इनकार कर दिया जिसमें उन्होंने आरटीआई केतहत महाराष्ट्र केपूर्व उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के इनकम टैक्स रिटर्न की प्रति मुहैया कराने की मांग की थी।
न्यायमूर्ति एमवाई इकबाल की अध्यक्षता वाली पीठ ने मुंबई हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली पूर्व सूचना आयुक्त याचिका को यह कहते हुए स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि इसमें कोई मेरिट नहीं है।
दलीलें हुईं दरकिनार
वास्तव में अदालत को यह तय करना था कि क्या इनकम टैक्स रिटर्न पब्लिक
प्रापर्टी केतहत आता है या नहीं। पूर्व सूचना आयुक्त की ओर से पेश वकील ने
पीठ के समक्ष चंद दलीलें भी पेश की लेकिन अदालत ने उनकी दलीलों को दरकिनार
कर दिया।
जिसके बाद वकील ने याचिका को वापस करने की बात कही, जिसकी इजाजत
अदालत ने दे दी। गौरतलब है कि शैलेश गांधी फिलहाल ग्रेटर मुंबई नगर
निगम द्वारा गठित तकनीकी सलाहकार समिति के मानद चेयरमैन हैं।
यह समिति
आरटीआई मामले में सलाह देती है। वर्ष 2012 में गांधी ने आरटीआई के तहत अजीत
पवार के तीन सालों इनकम टैक्स रिटर्न और बैलेंस सीट की प्रति मांगी थी।
यह निजी जानकारी नहीं
चूंकि यह मामला तीसरी पार्टी से संबंधित था इसलिए आयकर विभाग के जन सूचना
अधिकारी ने पवार से इसकी इजाजत मांगी, लेकिन पवार ने अपनी स्वीकृति देने से
इनकार कर दिया।
इसकेबाद केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने भी गांधी की
याचिका खारिज कर दी। सीआईसी ने अपने फैसले में कहा था कि किसी व्यक्ति
द्वारा दाखिलइनकम टैक्स रिटर्न उनकी निजी जानकारी होती है, लिहाजा इसकी
जानकारी आरटीआई के तहत नहीं दी जा सकती।
आयोग ने कहा था कि जब तक व्यापक
जनहित केलिए यह आवश्यक न हो, इसका खुलासा नहीं किया जा सकता। इसकेबाद गांधी
ने मुंबई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन हाईकोर्ट ने भी उनकी
याचिका खारिज कर दी थी।